Cyclone Arnab Alert: 12 किमी/घंटा की रफ्तार से आगे बढ़ रहा डीप डिप्रेशन, ‘अर्नब’ का खतरा; ओडिशा में स्कूल बंद
समुद्र में मौसमी हलचल तेज हो गई है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य हिस्से पर एक गहरा दबाव (Deep Depression) सक्रिय है। बीते 6 घंटों के दौरान यह प्रणाली लगभग 12 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पश्चिम दिशा की ओर अग्रसर हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस गहरे दबाव के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 23 सितंबर की रात तक कलिंगपट्टनम के समीप, विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश व दक्षिणी ओडिशा के तटीय क्षेत्रों को पार करने की प्रबल संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना सहित आसपास के इलाकों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

1. चक्रवात अर्नब बनने की आशंका
बंगाल की खाड़ी में बने इस दबाव के यदि और तीव्र होकर चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की स्थिति बनती है, तो इसे ‘अर्नब’ (Arnab) के नाम से जाना जाएगा। हालांकि, फिलहाल मौसम विभाग ने इसे आधिकारिक तौर पर चक्रवात घोषित नहीं किया है और यह अभी डीप डिप्रेशन के रूप में ही सक्रिय है।
2. ओडिशा में भारी बारिश की आशंका
इस मौसमी सिस्टम का सर्वाधिक असर ओडिशा राज्य में देखने को मिल सकता है। 23 और 24 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसके बाद 25 और 26 सितंबर को भी राज्य के कुछ क्षेत्रों में तेज से बहुत तेज बारिश का क्रम जारी रह सकता है। IMD के क्षेत्रीय केंद्र ने 23-24 सितंबर के लिए मूसलाधार बारिश का विशेष रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और तूफानी हवाओं के झोंके 70 किमी/घंटा तक पहुंचने का अनुमान है।
3. ओडिशा में स्कूल बंद
भारी बारिश के खतरे को देखते हुए ओडिशा प्रशासन ने प्रभावित जिलों में शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही आपातकालीन सेवाओं में लगे कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और तटीय व संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ व राज्य आपदा मोचन बल (ODRAF) की टीमें तैनात की गई हैं।
विशेष रूप से मलकानगिरी जिले में 24 सितंबर तक सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने की घोषणा हुई है। हालांकि, स्थिति पर नजर रखने के लिए शिक्षकों व अन्य स्कूल स्टाफ को ड्यूटी पर उपस्थित रहने को कहा गया है। संस्था प्रमुखों को रोस्टर प्रणाली लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर स्कूल परिसरों का उपयोग राहत शिविरों के रूप में तुरंत किया जा सके।

4. कैसे तय होता है चक्रवात का नाम?
समुद्री तूफानों का नामकरण पूर्व-निर्धारित नियमावली और सूची के आधार पर किया जाता है। उत्तरी हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) क्षेत्र में उठने वाले तूफानों का नाम तय करने की जिम्मेदारी नई दिल्ली स्थित IMD के क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र (RSMC) की होती है।
इस क्षेत्र से जुड़े 13 सदस्य देश तूफानों के लिए संभावित नामों की सूची तैयार करते हैं। प्रत्येक देश द्वारा 13-13 नाम दिए गए हैं, जिससे कुल 169 नामों की एक सूची बनी है। सूची में शामिल नामों का उपयोग क्रमानुसार किया जाता है और एक बार प्रयोग में लाए गए नाम को दोबारा दोहराया नहीं जाता।
5. अगला चक्रवात कौन-सा होगा?
आगामी तूफान का नाम इस बात पर निर्भर करेगा कि वर्तमान डीप डिप्रेशन चक्रवाती रूप धारण करता है या नहीं। यदि यह सिस्टम चक्रवात में बदलता है, तो क्रम के अनुसार इसे ‘अर्नब’ (Arnab) नाम दिया जाएगा, जो बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित नाम है। इसके बाद आने वाले अगले तूफान का नाम भारत द्वारा दिया गया ‘मुरासु’ (Murasu) होगा।

