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October 3, 2026

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चुनाव आयोग में 14 बार लिखित आपत्तियों का मामला, विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेरा; पद से हटाने की उठी मांग

 भारतीय निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह विवाद तब उपजा जब आयोग के भीतर ही दो अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा जताई गई लिखित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट मीडिया के माध्यम से सामने आई।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने विगत 10 महीनों में आयोग के विभिन्न निर्णयों पर कम से कम 14 मौकों पर अपनी असहमति दर्ज कराई है। ये आपत्तियां नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, वोटर लिस्ट से नाम हटाने व बहाल करने और मतदाता डेटाबेस से जुड़े आईटी सिस्टम से संबंधित थीं।

1. फॉर्म-6 में बदलाव पर भी आपत्ति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग द्वारा उठाए गए कुछ कदमों को नियमानुसार ‘अवैध’ और ‘अनधिकृत’ करार दिया। इनमें से एक मुख्य आपत्ति नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों को लेकर थी। इसके अतिरिक्त, दोनों आयुक्तों ने वोटर डेटा से जुड़े आईटी सिस्टम के केंद्रीकरण (Centralization) पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे।

2. जयराम रमेश ने साधा निशाना

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मीडिया रिपोर्ट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग की संवैधानिक निष्पक्षता और साख को गंभीर ठेस पहुंची है।

3. संसद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग

सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने भी इस मुद्दे पर आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का कामकाज अब एक व्यक्ति विशेष की इच्छाओं तक सीमित होकर रह गया है। ब्रिटास ने मांग की कि संसद में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने (रिमूवल प्रोसीजर) की कानूनी प्रक्रिया तुरंत शुरू की जानी चाहिए।

4. 73 सांसद दे चुके हैं हटाने का नोटिस

सांसद ब्रिटास ने अप्रैल 2026 में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दाखिल किए गए नोटिस का उल्लेख किया। उल्लेखनीय है कि 24 अप्रैल को उच्च सदन (राज्यसभा) में विपक्ष के 73 सांसदों ने उनके खिलाफ कुल नौ संगीन आरोप लगाते हुए पद से हटाने का औपचारिक नोटिस सौंपा था।

5. SIR को लेकर भी सवाल

जॉन ब्रिटास ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि चुनाव आयोग के सदस्य खुद SIR से जुड़े निर्णयों पर सवाल उठा रहे हैं, तो सर्वोच्च न्यायालय को इसकी संवैधानिक वैधता का संज्ञान लेना चाहिए।

6. विपक्षी नेताओं ने क्या कहा?

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने सभी विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर लामबंद होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए निर्वाचन आयोग के काम-काज में पारदर्शिता और संस्थागत सुधार बेहद जरूरी हैं।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने भी चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए और SIR प्रक्रिया में दिख रही कथित कमियों पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त से स्पष्टीकरण मांगा।

7. आयोग की ओर से जवाब नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित समाचार पत्र ने 21 सितंबर को निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर इन आपत्तियों और उन पर की गई सुधारात्मक कार्रवाई के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि, समाचार प्रकाशित होने तक आयोग की ओर से इन सवालों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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