12 साल में तीन गुना बढ़ा भारत का रक्षा बजट, फिर चीन से मुकाबला क्यों मुश्किल? ITBP चीफ के बयान से उठे सवाल
क्या चीन की बढ़ती आधुनिक सैन्य क्षमता ने भारत के सामने एक गंभीर और नई चुनौती खड़ी कर दी है? यह सवाल भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण बयान के बाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कपूर ने स्पष्ट किया है कि चीन ने अपनी सेना को हाई-टेक बनाने में भारी-भरकम पूंजी निवेश किया है, जिसके चलते पारंपरिक तरीकों से उसका सामना करना अब बेहद कठिन हो चुका है।

चीन की सैन्य ताकत और पारंपरिक युद्ध रणनीतियों की सीमाएं
राजस्थान के अलवर में 22 अक्टूबर को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ITBP डीजी शत्रुजीत सिंह कपूर ने चीन की आक्रामक सैन्य तैयारियों पर बात की। उन्होंने रेखांकित किया कि चीन भारत का सबसे ताकतवर पड़ोसी और प्रमुख रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी है, और उसके साथ लगने वाली सीमा देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सीमाओं में से एक है।

उन्होंने बताया कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के आधुनिकीकरण के लिए चीन ने बड़े पैमाने पर वित्तीय निवेश किया है, जिससे उसकी सेना अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस हो गई है। ऐसी स्थिति में, पुरानी और पारंपरिक युद्ध रणनीतियों पर टिके रहकर ड्रैगन का मुकाबला करना असंभव सा होता जा रहा है।
इस दौरान उन्होंने यह भी जोर दिया कि बदलते दौर में ‘ड्रोन’ तकनीक एक बहुत बड़ी चुनौती होने के साथ-साथ एक बेहतरीन अवसर भी बन चुकी है। रूस-और-यूक्रेन संघर्ष का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए कोई छोटा राष्ट्र भी किसी बड़ी सैन्य महाशक्ति को कड़ी टक्कर दे सकता है, इसलिए सुरक्षा बलों को भी भविष्य के युद्धों के अनुकूल अपनी तकनीक और क्षमता को उन्नत करना होगा।
अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर वर्तमान स्थिति
ITBP महानिदेशक ने जानकारी दी कि हाल ही के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई सीमावर्ती क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने आने की स्थितियां बनी हैं और कुछ स्थानों पर यह तनाव अभी भी बरकरार है। गौरतलब है कि सीमा पर जारी इस गतिरोध को दूर करने के लिए सितंबर महीने में दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय सैन्य प्रयास भी हुए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के ताकसिंग सेक्टर में तनाव कम करने के उद्देश्य से 6 सितंबर को वाचा-दामाई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की वार्ता आयोजित की गई थी। इसके बावजूद, ITBP प्रमुख के इन बयानों से यह साफ जाहिर होता है कि मैदानी स्तर पर कुछ मोर्चों पर आमने-सामने की तनातनी अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
इस बयान के ठीक अगले दिन, यानी 23 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भी चीनी सैनिक तय गश्ती प्रोटोकॉल से हटकर हरकतें करते हैं, तो सीमा पर तनाव उत्पन्न होता है। उन्होंने दोहराया कि भारत और चीन इस विवाद को सुलझाने के लिए लगातार कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के संपर्क में हैं तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर आपसी गलतफहमियों को दूर करने के तरीकों पर काम कर रहे हैं।
ITBP चीफ के बयानों और मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल पर सवाल

मई 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यभार संभालने के बाद से केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। पिछले 12 वर्षों से अधिक के इस कार्यकाल में देश के रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की गई है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन तथा आधुनिक हथियारों की खरीद पर खास जोर दिया गया है। इसके बावजूद, ITBP प्रमुख के इस तरह के बयानों से देश की सुरक्षा तैयारियों, सीमा सुरक्षा के बुनियादी ढांचे और चीन की बढ़ती सामरिक चुनौती से निपटने की हमारी रणनीतिक क्षमता पर नए सिरे से विचार और सवाल खड़े होने लगे हैं।
