एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सरकार का बड़ा फैसला: केंद्रीय उत्पाद शुल्क पूरी तरह माफ, प्रदूषण कम करने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की तैयारी
परिचय (Introduction)
देश में पर्यावरण के अनुकूल और स्वदेशी ईंधन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol-Blended Petrol) पर लगने वाले केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Central Excise Duty) को पूरी तरह से हटा दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में हरित ऊर्जा (Green Energy) के इस्तेमाल को गति देना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करना है।
क्या है सरकार का नया फैसला? (What is the Government’s New Decision?)
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की ओर से जारी आदेश के तहत, पेट्रोल में मिलाए जाने वाले एथेनॉल पर अब कोई उत्पाद शुल्क नहीं लिया जाएगा। पहले इस पर टैक्स का एक हिस्सा लागू होता था, लेकिन अब इस छूट के बाद तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण करना काफी किफायती हो जाएगा। सरकार का मानना है कि इस टैक्स माफी से एथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगों और किसानों दोनों को बड़ा फायदा पहुंचेगा।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर? (Impact on Common Public and Economy)
इस बड़े नीतिगत बदलाव से आने वाले समय में पेट्रोल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है। चूंकि भारत अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा विदेशी कच्चे तेल से पूरा करता है, इसलिए एथेनॉल का मिश्रण बढ़ने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी। इसके अलावा, पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ने से वाहनों से होने वाले हानिकारक कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने में मदद मिलेगी।
किसानों के लिए मुनाफे का सौदा (A Profitable Deal for Farmers)
एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के रस, शीरे (Molasses) और खराब हो चुके अनाजों से तैयार किया जाता है। सरकार के इस फैसले से चीनी मिलों और एथेनॉल प्लांट लगाने वाली कंपनियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। मांग बढ़ने के कारण सीधे तौर पर देश के गन्ना उत्पादक और अन्य किसानों की आय में इजाफा होगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी काफी मजबूती मिलेगी।


