भारतीय शेयर बाजार 10 जून 2026: वैश्विक तनाव के बीच घरेलू बाजार गुलजार, रिलायंस-मेटा समझौते से पलटा निवेशकों का मूड
वैश्विक स्तर पर जारी उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक चिंताओं के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 10 जून को सकारात्मक माहौल देखने को मिला। जहां दुनिया भर के प्रमुख बाजारों में मंदी का रुख था, वहीं घरेलू सूचकांक बढ़त के साथ खुले। शुरुआती सत्र के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 350 अंकों से अधिक की छलांग लगाकर 74,272 के आंकड़े पर पहुंच गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी तेजी का रुख दिखाते हुए 23,330 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया।
बाजार में तेजी के पीछे असली खिलाड़ी कौन?
इस शानदार तेजी की मुख्य वजह दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) में देखी जा रही भारी लिवाली है। रिलायंस के शेयरों में करीब 2.5 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया और यह 1,300 रुपये के स्तर को छू गया। निवेशकों के इस उत्साह के पीछे रिलायंस और सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) के बीच हुई एक बड़ी पार्टनरशिप है। दोनों कंपनियां मिलकर गुजरात के जामनगर में एक अत्याधुनिक एआई (AI) आधारित डेटा सेंटर स्थापित करने जा रही हैं। इस डील से रिलायंस की भविष्य की विकास योजनाओं को लेकर निवेशकों का भरोसा काफी मजबूत हुआ है। इसके अलावा, बैंकिंग क्षेत्र के बड़े नाम जैसे ICICI बैंक, HDFC बैंक और एफएमसीजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां हिंदुस्तान यूनिलीवर और ITC भी बाजार को सहारा देने में आगे रहीं।
दुनिया भर में घबराहट, भारत पर असर क्यों नहीं?
वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो आज एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली का माहौल रहा। जापान का निक्केई (Nikkei) और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) जैसे बड़े इंडेक्स में 1 से 4 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट देखी गई। इस अंतरराष्ट्रीय मंदी का मुख्य कारण मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में अमेरिका और ईरान के बीच गहराता भू-राजनीतिक तनाव है। इस विवाद के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट वी.के. विजयकुमार के अनुसार, भारतीय बाजार फिलहाल इन वैश्विक चिंताओं को दरकिनार कर आगे बढ़ रहा है क्योंकि घरेलू निवेशकों का भरोसा देश की आर्थिक और कॉर्पोरेट ग्रोथ पर मजबूती से टिका हुआ है।
क्या आगे भी तेजी बरकरार रहेगी?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में निफ्टी के लिए 23,100 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण और मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा। जब तक सूचकांक इस दायरे से ऊपर बना रहता है, तब तक बाजार में और तेजी आने की संभावनाएं बनी रहेंगी। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी सामने हैं; जैसे कि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों से लगातार अपनी पूंजी निकाल रहे हैं, जो थोड़ा चिंताजनक है। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट के शेयरों पर भी थोड़ा बिकवाली का दबाव बना हुआ है। ऐसे में जानकारों की सलाह है कि निवेशकों को फिलहाल बेहद समझदारी और सावधानी के साथ ही निवेश के फैसले लेने चाहिए।


