June 25, 2024

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जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी ने अन्तरराष्ट्रीय मातृदिवस समारोह मनाया

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जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के बिस्टूपुर परिसर में अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रुप से माननीय कुलपति प्रो० ( डॉ० ) अजिला गुप्ता समेत अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ० किश्वर आरा, अधिष्ठाता मानविकी संकाय डॉ सुधीर कुमार साहु, अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय मंच पर उपस्थित थे। दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई । स्वागत संबोधन अध्यक्ष, स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग डॉ० पुष्पा कुमारी द्वारा किया गया । अध्यक्ष, स्नातकोत्तर संगीत विभाग, डॉ सनातन दीप द्वारा ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गीत की प्रस्तुति की गई। विषय प्रवेश अधिष्ठाता मानविकी संकाय डॉ सुधीर कुमार साहु द्वारा किया गया। इन्होंने अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा के प्रारंभ और महत्व को उजागर किया गया।

माननीय कुलपति प्रो. ( डॉ. ) अंजिला गुप्ता ने अपने संबोधन में इस दिन के महत्व को बताया।

“यूनेस्को ने दुनिया भर की भाषाओं और संस्कृति को सम्मान देने के लिए अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की पहल की। यह हमें मातृभाषा के संरक्षण के प्रति जागरूक करता है। भारतीय संस्कृति बहुत विशाल है और उतनी ही विशाल है हमारी मातृभाषाओ की श्रृंखला। प्रारंभ मे यहाँ गुरुकुल की परम्परा थी और मातृभाषा भी गुरु की गोद में पलती बढ़ती थी। जब ब्रिटिश यहाँ आए तो उन्होंने यहाँ की संस्कृति को समाप्त करने के लिए मातृभाषा पर प्रहार किया। विविध संस्कृति से सजी हमारी भारत भूमि का सही प्रतिबिंब विविध मातृभाषाओं में मिलता है। किंतु दुर्भाग्य से हमारी बहुत सारी मातृभाषाएं समाप्त हो चुकी हैं और कुछ समाप्ति के कगार पर हैं। यदि हम भारतीय संस्कृति को वर्षों तक विविध रंगों वाला बनाए रखना चाहते हैं तो हमें अपनी सभी मातृभाषाओं का संरक्षण करना होगा।”
– प्रो. ( डॉ. ) अंजिला गुप्ता, माननीय कुलपति

जमशेदपुर शहर को भी उन्होंने अपने व्याख्यान में विविध मातृभाषाओं वाली संस्कृति का केन्द्र कहा है। उनके अनुसार यहां सिर्फ लौह नहीं पिघलता है बल्कि संस्कृतियाँ पिघलती हैं।

इसके बाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया । सरस्वती वन्दना संस्कृत विभाग की तनुजा कुमारी एवं नूतन मुण्डा द्वारा किया गया। श्रीमती अनुराधा के निर्देशन में शिक्षा संकाय की छात्राओं ने मैथिली नाटक प्रस्तुत किया । उर्दू विभाग की दरख्शाँ रुमान एवं मलायका वारिस द्वारा ‘ उर्दू है मेरा नाम ‘ पर नज़्म प्रस्तुत किया गया। स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग की लता, देवी रानी, रशिम, ब्यूटी, श्वेता एवं सुहानी द्वारा विभिन्न मातृ भाषाओं के माध्यम से नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया । इसके द्वारा भाषागत एकता को दिखाया गया। सुनीता कुन्तिया, जयन्ती बारी, संजना बोदरा एवं मनीषा समद द्वारा सामूहिक हो गीत की प्रस्तुति की गई। शिक्षा संकाय की छात्राओं द्वारा हो नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति की गई । बंगला विभाग की ब्यूटी एवं मनीषा द्वारा बंग्ला नृत्य प्रस्तुत किया गया । अंग्रेजी विभाग की नवनिता , शिवानी, डलिया , प्रियंका, रुपाली, इषिका, ए मोनिका, रशिम एवं सुनीता द्वारा सामूहिक अंग्रेजी गीत प्रस्तुत किया गया । धन्यवाद ज्ञापन अंग्रेजी विभाग अध्यक्ष मनीषा टाइटस द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रुप से इस कार्यक्रम की समन्वय डॉ पुष्पा कुमारी, डॉ रिजवाना परवीन, श्रीमती अमृता कुमारी, डॉ ग्लोरिया पूर्ति, डॉ सोनाली, डॉ संजय भुईया शिक्षा संकाय के शिक्षक गण ,शिक्षकेतर बंधु एवं छात्राएं उपस्थित थी ।

International Mother Language Day was organized at Bistupur campus of Jamshedpur Women’s University. Honorable Vice-Chancellor Prof. (Dr.) Ajila Gupta and Dean Student Welfare Dr. Kishwar Ara, Dean Humanities Faculty Dr. Sudhir Kumar Sahu, Dean Commerce Faculty were present on the stage mainly in the program. The program was started with the lighting of the lamp. The welcome address was done by Dr. Pushpa Kumari, Head, Post Graduate Department of Hindi. The song ‘Mile Sur Mera Tumhaara’ was performed by Dr. Sanatan Deep, Head, Post Graduate Music Department. Subject entry was done by Dr. Sudhir Kumar Sahu, Dean, Faculty of Humanities. He highlighted the beginning and importance of international mother tongue.

Honorable Vice Chancellor Prof. (Dr.) Anjila Gupta told the importance of this day in her address.

“UNESCO initiated the International Mother Language Day to honor the languages ​​and culture around the world. It makes us aware of the importance of preserving the mother tongue. Indian culture is vast and equally vast is the range of our mother tongues. Initially here There was a tradition of Gurukul and the mother tongue also grew in the lap of the Guru. When the British came here, they attacked the mother tongue to end the culture here. The true reflection of our land of India adorned with diverse culture is found in various mother tongues. But unfortunately many of our mother tongues have died out and some are on the verge of extinction. If we want to keep the Indian culture colorful over the years, we have to preserve all our mother tongues.”
– Pro. (Dr.) Anjila Gupta, Honorable Vice Chancellor

In his lecture, he has also called the city of Jamshedpur as the center of culture with diverse mother tongues. According to him, not only iron melts here, but cultures also melt.

After this, a cultural program was also organized. Saraswati Vandana was performed by Tanuja Kumari and Nutan Munda of Sanskrit Department. Under the direction of Mrs. Anuradha, the students of the Faculty of Education presented a Maithili play. ‘Urdu Hai Mera’ by Ruman and Malaika Waris of Urdu Department

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