June 17, 2024

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झारखंड: निजी हाथों में जा सकती है शराब की बिक्री, कम राजस्व को देखते हुए निर्णय ले सकती है राज्‍य सरकार

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आगामी वित्तीय वर्ष 2023-24 में शराब की बिक्री एक बार फिर निजी हाथों में जा सकती है। इसका मुख्य कारण शराब के शौकीनों को वर्तमान वित्तीय वर्ष में हुईं परेशानियां व राजस्व की कमी है

रांची, राज्य ब्यूरो: आगामी वित्तीय वर्ष 2023-24 में शराब की बिक्री एक बार फिर निजी हाथों में जा सकती है। इसका मुख्य कारण शराब के शौकीनों को वर्तमान वित्तीय वर्ष में हुईं परेशानियां व राजस्व की कमी है।

वर्तमान वित्तीय वर्ष 2022-23 में 2200 करोड़ के राजस्व लक्ष्य का पीछा करते हुए विभाग ने अब तक केवल 1609 करोड़ राजस्व हासिल किया है। चालू वित्तीय वर्ष के समापन में केवल एक महीना ही बचा है।

आयुक्‍त उत्‍पाद ने सभी जिला उपायुक्‍तों को लि‍खा पत्र

ऐसी स्थिति में आगामी वित्तीय वर्ष में व्यवस्था सुचारू व बढ़िया तरीके से चल सके, इसके लिए आयुक्त उत्पाद कर्ण सत्यार्थी ने सभी जिलों के उपायुक्तों को पत्र लिखकरआगामी वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए उत्पाद लाइसेंस के बंदोबस्ती का प्रस्ताव भेजने को कहा है। जल्द ही प्रस्ताव आने के बाद बंदोबस्ती की प्रक्रिया भी जल्द होगी।

गौरतलब है कि राज्य में अभी राज्य सरकार स्वयं शराब बेच रही है। इसके लिए छत्तीसगढ़ के माडल को झारखंड में लागू किया गया है। उक्त माडल के अनुसार, प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से राज्य सरकार के खुदरा दुकानों में मैनपावर उपलब्ध कराया गया है।

वर्तमान उत्पाद नीति में ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम को भी प्रमुखता से लागू किया जाना था, जो अब तक सही तरीके से धरातल पर नहीं उतर सका। यहां तक की एमआरपी से भी ऊंची कीमत पर शराब की बिक्री की शिकायतें मिल रही हैं, जिसपर विभाग कार्रवाई भी कर रहा है।

इन शर्तों के साथ निजी हाथों में दी जाएगी शराब की बिक्री

झारखंड शराब व्यापारी संघ ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री जगरनाथ महतो को पत्र लिखकर यह भरोसा दिलाया है कि आगामी वित्तीय वर्ष में शराब की बिक्री उनके हाथों में दें, वे 3500 करोड़ रुपये का राजस्व देने को तैयार हैं।

हालांकि, संघ ने इसके लिए कुछ शर्तों को भी मंत्री के सामने रखा है। इन शर्तों में शराब की अधिकतम बिक्री दर (एमआरपी) पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से अधिक न हो। ऐसा होने से शराब की बिक्री बढ़ेगी और राजस्व बढ़ेगा।

खुदरा दुकानों की बंदोबस्ती स्लाइडिंग स्केल पद्धति के तहत हो। बिक्री कर को एक्साइज ड्यूटी में सम्मलित कर दिया जाय व पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की उत्पाद नीति का अवलोकन भी शामिल हैं।

संघ के अध्यक्ष अचिंत्य कुमार शा व महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने यह मांग लिखित रूप में की है, जिसपर सरकार विचार कर रही है।

In the coming financial year 2023-24, the sale of liquor may once again go into private hands. The main reason for this is the problems faced by the liquor lovers in the current financial year and lack of revenue.

Ranchi, State Bureau: In the coming financial year 2023-24, the sale of liquor may once again go into private hands. The main reason for this is the problems faced by the liquor lovers in the current financial year and lack of revenue.

Chasing the revenue target of 2200 crore in the current financial year 2022-23, the department has so far achieved only 1609 crore revenue. Only one month is left for the end of the current financial year.

Product commissioner wrote a letter to all district deputy commissioners

In such a situation, for the system to run smoothly and well in the coming financial year, Commissioner Product Karna Satyarthi has written a letter to the Deputy Commissioners of all the districts asking them to send a proposal for settlement of product licenses for the coming financial year 2023-24. Soon after the proposal comes, the endowment process will also be quick.

Significantly, the state government itself is selling liquor in the state. For this, the model of Chhattisgarh has been implemented in Jharkhand. According to the above model, manpower has been made available in the retail outlets of the State Government through placement agencies.

The track and trace system was also to be implemented prominently in the current product policy, which could not land properly till now. Even complaints are being received about the sale of liquor at a higher price than the MRP, on which the department is also taking action.

Sale of liquor will be given in private hands with these conditions

The Jharkhand Liquor Traders Association has written a letter to Excise and Prohibition Minister Jagarnath Mahato, assuring him to hand over the sale of liquor in the coming financial year, as they are ready to give a revenue of Rs 3,500 crore.

However, the union has also put some conditions before the minister for this. Under these conditions, the maximum selling rate (MRP) of liquor should not exceed that of the neighboring state of West Bengal. Due to this, the sale of liquor will increase and the revenue will increase.

The endowment of retail shops should be done under the sliding scale method. excise duty to sales tax

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