निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर कौन हैं? नोटबंदी पर मोदी सरकार की आलोचना से लेकर SIR के विरोध तक, जानें सबकुछ
देश की राजनीति में जहां एक तरफ निर्मला सीतारमण केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में बेहद अहम और ताकतवर जिम्मेदारियां संभाल रही हैं, वहीं दूसरी ओर उनके पति परकला प्रभाकर कई मौकों पर सरकार की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों पर मुखर होकर सवाल उठाते रहे हैं। जहां सीतारमण भारतीय जनता पार्टी की एक वरिष्ठ नेता और देश की वित्त मंत्री हैं, वहीं प्रभाकर अक्सर अपने बयानों, लेखों और विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में रहते हैं। इस विशेष आलेख में हम उनकी शुरुआती जीवन यात्रा, जेएनयू के दिनों से लेकर राजनीतिक सफर और वैचारिक मतभेदों तक के हर पहलू को विस्तार से जानेंगे।

“हर गली में जंतर-मंतर!”
हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर करते हुए परकला प्रभाकर ने लिखा, “हर गली में जंतर-मंतर! शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को लोकतंत्र की बहाली के लिए एक जन मार्च निकाला जाएगा। आइए, इस चुनौती का सामना करने के लिए आगे आएं।”

चुनाव आयोग की ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया के विरोध में आयोजित इस ‘पीपुल्स मार्च टू रिस्टोर डेमोक्रेसी’ में परकला प्रभाकर भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ मतदाता सूची से नाम काटे जाने के गंभीर आरोपों को लेकर एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत बंद करने की मांग उठाई जा रही है।
परकला प्रभाकर कौन हैं? (विजयवाड़ा से लंदन तक की शैक्षणिक यात्रा)

परकला प्रभाकर की शुरुआती शिक्षा-दीक्षा आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित आंध्र लोयोला कॉलेज से पूरी हुई, जहाँ उन्होंने स्नातक (बीए) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह देश की राजधानी दिल्ली आए और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) से एमए तथा एमफिल की पढ़ाई पूरी की। आगे की उच्च शिक्षा के लिए वे ब्रिटेन गए, जहाँ साल 1991 में उन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
JNU में हुई थी परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण की पहली मुलाकात
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रभाकर ने अपने पिता की तरह चुनावी राजनीति में शुरुआती संघर्षों के बाद अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जेएनयू का रुख किया था। यहीं परिसर में उनकी पहली मुलाकात निर्मला सीतारमण से हुई। दोनों छात्र राजनीति के दौरान ‘फ्रीथिंकर्स’ नामक एक वैचारिक समूह से जुड़े हुए थे, जहाँ अक्सर देश की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर खुली चर्चाएं होती थीं।

यहीं से दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने विवाह करने का निर्णय लिया। इसके बाद दोनों उच्च शिक्षा के लिए लंदन चले गए। लंदन में जहां प्रभाकर ने अपनी पीएचडी पूरी की, वहीं निर्मला सीतारमण ने शुरुआती दिनों में एक स्थानीय डेकोर की दुकान पर सेल्सवुमन के रूप में भी काम किया और बाद में प्राइसवाटरहाउसकूपर्स में पूर्वी यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं पर रिसर्च का कार्य संभाला। सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, परकला प्रभाकर और निर्मला सीतारमण का विवाह 12 सितंबर 1986 को संपन्न हुआ था।
बेटी के जन्म के बाद हैदराबाद वापसी
1990 के दशक के शुरुआती दौर में अपनी इकलौती बेटी के जन्म के बाद यह दंपति वापस हैदराबाद और नरसापुर लौट आया। हैदराबाद में बसने के बाद परकला प्रभाकर ने एक मार्केटिंग रिसर्च फर्म की स्थापना की। इसके अलावा, उन्होंने अपने दिवंगत पिता की याद में एक ट्रस्ट की शुरुआत की और साथ ही निर्मला सीतारमण के साथ मिलकर ‘प्रणव’ नाम से एक स्कूल की भी नींव रखी।
कांग्रेस से लेकर बीजेपी और चिरंजीवी की पार्टी तक का सफर
राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाले परकला प्रभाकर ने वर्ष 1994 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर आंध्र प्रदेश की नरसापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें उस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से उनके संबंध काफी प्रगाढ़ रहे। कुछ समय बाद उन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया।
इसके बाद, साल 2008 में जब मशहूर अभिनेता चिरंजीवी ने अपनी ‘प्रजा राज्यम पार्टी’ बनाई, तो प्रभाकर उसके संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे। हालांकि, बाद में राजनीतिक गतिरोधों और मतभेदों के चलते उन्होंने इस दल से भी दूरी बना ली।
गौरतलब है कि उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनकी माता कांग्रेस पार्टी की विधायक रह चुकी हैं, जबकि उनके पिता परकला शेषावतारम 1970 के दशक में कांग्रेस सरकार के दौरान प्रभावशाली मंत्री पद संभाल चुके थे।
