काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर चौथी राम यादव का निधन
आदरणीय प्रोफेसर चौथी राम यादव सर ( काशी हिन्दू विश्वविद्यालय) जी का निधन से सभी स्तब्ध है। आप का जाना हिंदी साहित्य के लिए अपूर्णीय क्षति है। आप साहित्य से हांसिए के समाज के सबसे बड़े पैरोकार थे। प्रगतिशील साहित्य के एक शसक्त हस्ताक्षर सादर जोहार नमन। विनम्र श्रद्धांजलि….!!

प्रोफेसर चौथीराम यादव सर भारतीय साहित्य के प्रमुख अध्येता और लेखक थे, जिनका जन्म 29 जनवरी,1941 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर ज़िले के कायमगंज गाँव में हुआ था। उन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से हिंदी भाषा में स्नातक, स्नातकोत्तर,और पीएच.डी. प्राप्त किया। नवम्बर 1971 से जनवरी 2003 तक काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अध्यापन के साथ हिंदी साहित्य में अमूल्य योगदान दिया एवं अध्यक्ष पद को भी सुसोभित किया। आपने अपने अध्यापन और शोध कार्य के माध्यम से हिंदी साहित्य को एक नया दृष्टिकोण दिया।

आपकी प्रमुख कृतियाँ : ‘छायावादी काव्य : एक दृष्टि’, ‘मध्यकालीन भक्ति काव्य में विरहानुभूति की व्यंजना’, ‘हिन्दी के श्रेष्ठ रेखाचित्र’, ‘हजारीप्रसाद द्विवेदी का समग्र पुनरावलोकन’, ‘लोकधर्मी साहित्य की दूसरी धारा’, ‘लोक और वेद : आमने-सामने’ आदि। प्रो चौथीराम यादव सर ने नीदरलैंड की सांस्कृतिक यात्रा एवं ‘दि हेग’, ‘रोटरडम’ एवं ‘एम्सटर्डम’ में भक्ति-आन्दोलन और तुलसीदास से सम्बन्धित व्याख्यान हेतु यात्राएं किया । आपको कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जैसे ‘कबीर सम्मान’, ‘लोहिया साहित्य सम्मान’, ‘साहित्य साधना सम्मान’, आदि।
