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September 16, 2026

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भारत से लौट रहा था ईरानी जहाज, अमेरिका ने टारपीडो हमला कर डुबोया, 87 की मौत, WW-2 के बाद सबसे घातक हमला

US Sank Iran Warship IRIS Dena: ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका और इजरायल ने शिया देश ईरान पर हमले और तेज कर दिए हैं. हिंद महासागर में श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर टॉरपीडो से हमला कर उसे डुबो दिया. इस हमले में कम से कम 87 नौसैनिकों की मौत हो गई.

श्रीलंका की नौसेना के मुताबिक अब तक 87 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 32 लोगों को जीवित बचाकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. माना जा रहा है कि जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे, जिनमें से कई अब भी लापता हैं. यह वही युद्धपोत है जो पिछले महीने भारतीय नौसेना के इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलान-2026 में भी शामिल हुआ था.

सुबह भेजा था संकट संदेश

ईरानी नौसेना के साउदर्न फ्लीट का मौज (मौज) श्रेणी का फ्रिगेट IRIS Dena स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 5:30 बजे संकट संदेश भेजा था. उस समय जहाज श्रीलंका के शहर गाले से लगभग 40 समुद्री मील दूर समुद्र में मौजूद था.

श्रीलंका के रक्षा अधिकारियों ने बताया कि नौसेना और वायुसेना ने सुबह से ही बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया. अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की कि श्रीलंका के तट के पास मौजूद ईरानी युद्धपोत को अमेरिकी पनडुब्बी ने निशाना बनाया था. उन्होंने दावा किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार अमेरिका ने किसी दुश्मन जहाज को टॉरपीडो से डुबोया है.

पेंटागन की ओर से जारी एक वीडियो में हमले का दृश्य भी दिखाया गया है. वीडियो में युद्धपोत के पास एक बड़ा विस्फोट होता दिखाई देता है, जिससे जहाज का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इसके बाद जहाज पानी से ऊपर उठता है और फिर पीछे की ओर से डूबने लगता है. अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि 1945 के बाद पहली बार अमेरिकी नौसेना की किसी फास्ट-अटैक पनडुब्बी ने एक दुश्मन युद्धपोत को एक ही एमके-48 टॉरपीडो से डुबो दिया.

भारत से लौट रहा था ईरानी जहाज

इस क्षेत्र में ईरानी नौसेना की मौजूदगी आम तौर पर कम ही रहती है. IRIS Dena हाल के दिनों में कई राजनयिक नौसैनिक कार्यक्रमों में भाग ले रहा था. फरवरी में यह विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल हुआ था, जहां कई देशों के युद्धपोत एक साथ बंदरगाह पर खड़े थे. भारतीय नौसेना ने इसके आगमन पर औपचारिक स्वागत भी किया था.

यह फ्रिगेट ईरान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित माउंट डेना के नाम पर रखा गया था. ईरान में निर्मित यह युद्धपोत गश्त और युद्ध अभियानों के लिए डिजाइन किया गया था. इसमें एंटी-शिप मिसाइलें, नौसैनिक तोपें, टॉरपीडो लॉन्चर, हेलीकॉप्टर लैंडिंग पैड और आधुनिक रडार सिस्टम लगाए गए थे. सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार इसमें क़ादर एंटी-शिप मिसाइलें, 76 मिमी नौसैनिक तोप और टॉरपीडो सिस्टम जैसे हथियार मौजूद थे.

रणनीतिक रूप से अहम इलाका

श्रीलंका का दक्षिणी समुद्री क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों के करीब है, जो एशिया, मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ते हैं. यहां से अमेरिका, चीन और भारत सहित कई देशों के नौसैनिक जहाज नियमित रूप से गुजरते हैं.

श्रीलंका ने इस पूरे संघर्ष में तटस्थ रुख बनाए रखा है, लेकिन हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों के बीच उसकी भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है.

श्रीलंका की नौसेना के प्रवक्ता बुद्धिका संपथ ने बताया कि जहाज से सुबह-सुबह संकट संदेश मिला था, लेकिन एक घंटे के भीतर जब बचाव दल मौके पर पहुंचा तो युद्धपोत पूरी तरह डूब चुका था. समुद्र की सतह पर केवल तेल का धब्बा दिखाई दे रहा था. यह हमला गाले से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण में हुआ.

उन्होंने कहा कि यह इलाका हिंद महासागर में श्रीलंका के सर्च-एंड-रेस्क्यू क्षेत्र के भीतर आता है और उसी जिम्मेदारी के तहत बचाव अभियान चलाया गया. साथ ही श्रीलंका ने स्पष्ट किया कि वह इस संघर्ष में तटस्थ है और विवाद के समाधान के लिए बातचीत की अपील करता है. श्रीलंका की नौसेना और वायुसेना ने यह भी कहा कि वे बचाव अभियान की कोई वीडियो फुटेज जारी नहीं करेंगे, क्योंकि इसमें किसी दूसरे देश की सेना शामिल है.

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