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September 16, 2026

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Satya ke saath !! sadev !!

अतीक-अशरफ किए गए सुपुर्द-ए-खाक, कसारी मसारी कब्रिस्तान में किया गया दफन

 

*एनकाउंटर होगा, सड़क किनारे पड़ा मिलूंगा”- 19 साल पहले अतीक ने कहा था*

*अतिक को लगा पूजा पाल का श्राप,जिसकी 9 दिन की मेहंदी के रंग को कर दिया था खून से लाल,तब दिया था श्राप*

*हमलावरों ने कबूला गुनाह: कहा पाकिस्तान कनेक्शन,जुर्म की लंबी फेहरिस्त और फेमस होने के लिया अतिक-अशरफ को मारा*

*जिसकी उंगली पकड़ कर माफिया डॉन बना,उसी गुरु चांद बाबा को भी मार डाला था*

UP
प्रयागराज :-ये कहानी है माफिया अतीक अहमद की है. शनिवार को अतीक और उसके भाई अशरफ की प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों चार दिनों की पुलिस रिमांड पर थे। प्रयागराज के सरकारी अस्पताल में मेडिकल के लिए पुलिस ले गई थी। यहां से बाहर निकलने पर दोनों मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे और इसी वक्त तीन हमलावरों ने दोनों को गोलियों से भून दिया.अतीक को सिर पर सटाकर गोली मारी गई और इसके बाद अशरफ पर हमला हुआ। अतीक वो नाम था जिसकी एक समय खूब तूती बोलती थी.kआलम ये था कि अपराध की दुनिया हो या राजनीति की,जो अतीक कहता था वही होता था. ये वो दौर था जब अतीक का नाम प्रयागराज ही नहीं, बल्कि पूरे यूपी में गूंजता था। कहा जाता है कि उस वक्त अतीक जिस भी जमीन, घर या बंगले पर हाथ रख देता था, उसका मालिक उसे खाली करके चला जाता था। आज हम उसी अतीक की पूरी कहानी बताएंगे। कैसे वह अपराध से लेकर राजनीति की दुनिया तक का चर्चित नाम बन गया? कैसे एक तांगे वाले के बेटे ने दशहत का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया कि कानून भी उसके आगे बौना साबित होता रहा।

*पिता तांगा चलाते थे और बेटे ने 17 साल की उम्र में पहला मर्डर कर दिया*

10 अगस्त 1962 को इलाहाबाद में अतीक अहमद का जन्म हुआ। पिता फिरोज अहमद तांगा चलाकर परिवार चलाते थे। अतीक घर के पास में स्थित एक स्कूल में पढ़ने लगा.10वीं में पहुंचा तो फेल हो गया। इस बीच, वह इलाके के कई बदमाशों की संगत में आ गया। जल्दी अमीर बनने के लिए उसने लूट, अपहरण और रंगदारी वसूलने जैसी वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। 1997 में उसपर हत्या का पहला मुकदमा दर्ज हुआ। उस समय इलाहाबाद के पुराने शहर में चांद बाबा का खौफ हुआ करता था। चांद बाबा इलाहाबाद का बड़ा गुंडा माना जाता था। आम जनता, पुलिस और राजनेता हर कोई चांद बाबा से परेशान थे। अतीक अहमद ने इसका फायदा उठाया। पुलिस और नेताओं से सांठगांठ हो गई और कुछ ही सालों में वह चांद बाबा से भी बड़ा बदमाश बन गया। जिस पुलिस ने अतीक को शह दे रखी थी, अब वही उसकी आंख की किरकिरी बन गया।

*1989 में अतीक ने रखा राजनीति में कदम*

1986 में किसी तरह पुलिस ने अतीक को गिरफ्तार कर लिया। इसपर उसने अपनी राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाया। दिल्ली से फोन पहुंचा और अतीक जेल से बाहर हो गया। जेल से छूटने के बाद अतीक ने साल 1989 में राजनीति में कदम रखा। इलाहाबाद शहर पश्चिमी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। यहां उसका सीधा मुकाबला चांद बाबा से था। दोनों के बीच गैंगवार शुरू हो गया। अतीक की दहशत से पूरा इलाहाबाद कांपता था। कब्जा, लूट, छिनैती, हत्या ये सब उसके लिए आम सा हो गया। इसी की बदौलत वह चुनाव भी जीत गया। इसके कुछ महीनों बाद ही बीच चौराहे पर दिनदहाड़े चांद बाबा की हत्या हो गई।

लगातार पांच बार इलाहाबाद पश्चिमी सीट से रहा विधायक
चांद बाबा मारा गया तो इलाहाबाद ही नहीं, पूरे पूर्वांचल में अपराध की दुनिया में अतीक अहमद का सिक्का चलने लगा। साल 1991 और 1993 में भी अतीक निर्दलीय चुनाव जीता। साल 1995 में लखनऊ के चर्चित गेस्ट हाउस कांड में भी उसका नाम सामने आया। साल 1996 में सपा के टिकट पर विधायक बना। साल 1999 में अपना दल के टिकट पर प्रतापगढ़ से चुनाव लड़ा और हार गया। फिर 2002 में अपनी पुरानी इलाहाबाद पश्चिमी सीट से पांचवीं बार विधायक बना।आठ अगस्त 2002 की बात है। तब सूबे में बसपा का शासन था और मायावती मुख्यमंत्री थीं। अतीक को किसी मामले में पुलिस ने पकड़ा था और उसे जेल भेज दिया गया था। पेशी के लिए आठ अगस्त को उसे कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी बीच, उसपर गोलियों और बम से हमला हो गया। इसमें अतीक घायल हो गया, लेकिन उसकी जान बच गई। तब अतीक ने बसपा सुप्रीमो और तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती पर आरोप लगाया था कि वह उसे मरवाना चाहती हैं।

*अतीक के खिलाफ नहीं मिलते थे उम्मीदवार*
अतीक आतंक का पर्याय बन चुका था। उसकी दहशत ने आम लोगों के साथ-साथ राजनीतिक हस्तियों को भी परेशान करना शुरू कर दिया। उसका खौफ इतना हो गया था कि शहर पश्चिमी से कोई उसके खिलाफ चुनाव लड़ने से भी डरता था। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में अतीक अहमद सपा के टिकट पर इलाहाबाद की फूलपुर सीट से चुनाव जीत गया.kउस वक्त अतीक इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक था। इस सीट से अब वह अपने छोटे भाई अशरफ को चुनाव लड़ाने की तैयारी करने लगा।

* There will be an encounter, I will meet you lying on the road side”- said Atiq 19 years ago *

*Atik was cursed by Pooja Pal, whose 9-day mehndi had turned her color red with blood, then she cursed him*

The attackers confessed to the crime: Said Pakistan connection, long list of crimes and killed Atiq-Ashraf for fame

By holding whose finger the mafia don became, the same Guru Chand Baba was also killed.

UP
Prayagraj :- This is the story of Mafia Atiq Ahmed. Atiq and his brother Ashraf were shot dead in Prayagraj on Saturday. Both were on police remand for four days. The police had taken him to the government hospital in Prayagraj for medical examination. On exiting here, both were answering questions from the media and at the same time three assailants opened fire on both of them. Ateeq was shot in the head and after that Ashraf was attacked. Atiq was that name which used to speak a lot at one time. Whether it was the world of crime or politics, what Atiq used to say used to happen. This was the period when Atiq’s name resonated not only in Prayagraj, but in the whole of UP. It is said that at that time, whatever land, house or bungalow Atiq used to lay his hands on, its owner used to vacate it and go away. Today we will tell the full story of the same Atiq. How did he become a famous name from the world of crime to politics? How the son of a tonga seller built such an empire of Dashhat that even the law proved to be a dwarf in front of him.

The father used to drive a tonga and the son committed the first murder at the age of 17.

Atiq Ahmed was born on 10 August 1962 in Allahabad. Father Firoz Ahmed used to run the family by running a tonga. Atik started studying in a school located near the house. He failed when he reached the 10th standard. Meanwhile, he has come in the company of many gangsters of the area. To get rich quick, he started committing crimes like robbery, kidnapping and extortion. In 1997, the first case of murder was registered against him. At that time there used to be a fear of Chand Baba in the old city of Allahabad. Chand Baba was considered a big goon of Allahabad. Common public, police and politicians everyone was upset with Chand Baba. Atiq Ahmed took advantage of this. There was a nexus with the police and politicians and within a few years he

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