अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, सोशल मीडिया पर की घोषणा
प्रस्तावना
भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज और पूर्व उपकप्तान अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास का ऐलान कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से प्रशंसकों के साथ यह खबर साझा की।
अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को कहा अलविदा
भारतीय टीम के अनुभवी मध्यक्रम बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा लेने की घोषणा की है। लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम की रीढ़ माने जाने वाले रहाणे का अंतरराष्ट्रीय सफर अब औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। संकट के पलों में टीम को उबारने वाले और अपनी उत्कृष्ट तकनीक तथा संयमित रवैये के लिए पहचाने जाने वाले रहाणे काफी समय से टीम में वापसी का प्रयास कर रहे थे।
2023 में खेला था आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला
अजिंक्य रहाणे ने भारतीय जर्सी में अपना अंतिम मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था, जो उनका आखिरी टेस्ट भी बना। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिल सका। वहीं, एकदिवसीय (ODI) प्रारूप में उन्होंने अपना अंतिम मुकाबला 2018 में और टी-20 अंतरराष्ट्रीय में आखिरी मैच 2016 में खेला था। सीमित ओवरों के प्रारूप में जगह गंवाने के बाद उनका ध्यान मुख्य रूप से लाल गेंद के क्रिकेट पर केंद्रित रहा।
टेस्ट क्रिकेट में बनाया खास मुकाम
रहाणे ने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 85 टेस्ट मैचों की 144 पारियों में 38.46 की औसत के साथ कुल 5,077 रन बनाए। उनके नाम टेस्ट क्रिकेट में 12 शतक और 26 अर्धशतक दर्ज हैं। विदेशी सरजमीं पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में खेली गई उनकी कई पारियां भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे याद रखने योग्य पारियों में गिनी जाती हैं।
वनडे और टी-20 में भी निभाई अहम भूमिका
50 ओवरों के प्रारूप (ODI) में रहाणे ने 90 मुकाबलों में 35.26 की औसत से 2,962 रन का योगदान दिया, जिसमें उन्होंने शीर्ष और मध्यक्रम में अहम भूमिकाएं निभाईं। इसके अलावा टी-20 अंतरराष्ट्रीय के 20 मुकाबलों में उनके बल्ले से 20.83 की औसत से 375 रन निकले।
कप्तानी में भी छोड़ी छाप
रहाणे को जरूरत पड़ने पर भारतीय टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिली। 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर विराट कोहली की अनुपस्थिति में उन्होंने जिस तरह टीम का नेतृत्व किया और भारत को ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी दिलाई, उसे भारतीय क्रिकेट के महानतम अध्यायों में गिना जाता है।
घरेलू क्रिकेट में जारी रखा संघर्ष
राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बाद भी रहाणे ने हिम्मत नहीं हारी और डोमेस्टिक क्रिकेट तथा आईपीएल में लगातार अच्छा प्रदर्शन करके वापसी के दरवाजे खटखटाते रहे। हालांकि, चयनकर्ताओं का रुख भविष्य की ओर होने के कारण उन्हें दोबारा मौका नहीं मिल सका।
