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September 15, 2026

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मिडिल ईस्ट जंग के बीच पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत, सरकार ने घटाई एक्साइज ड्यूटी

Petrol Diesel Excise Duty Cut: दुनिया भर में चल रहे ऊर्जा संकट और अमेरिका-इजरायल के ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, भारत सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत दी है. सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) को भारी मात्रा में घटा दिया है. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में फ्यूल की कीमतों को काबू में रखना और महंगाई से लड़ना है. 

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम अब कम होंगे?

जी हां, सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर सिर्फ 3 रुपये कर दिया है.  वहीं, डीजल पर तो इसे पूरी तरह खत्म करते हुए शून्य (Nil) कर दिया गया है. इससे पहले निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए थे, लेकिन सरकार के इस कदम से अब कीमतों में गिरावट आने की पूरी उम्मीद है. 


क्यों लेना पड़ा टैक्स कटौती का फैसला?

इस समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं. ईरान के साथ युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी की वजह से दुनिया का लगभग 20-25% तेल सप्लाई रुक गया है. भारत अपनी जरूरत का 12-15% तेल इसी रास्ते से मंगाता है. बाजार में मचे इसी हड़कंप को देखते हुए सरकार ने टैक्स कम किया है ताकि तेल कंपनियों (OMCs) पर बोझ न पड़े. 

क्या हवाई सफर अब महंगा हो जाएगा?

जहां एक तरफ सड़क पर चलने वाली गाड़ियों को राहत मिली है, वहीं हवाई फ्यूल (ATF) पर सख्ती बरती गई है. सरकार ने एविएशन फ्यूल पर 50 रुपये प्रति लीटर की नई ड्यूटी लगाई है, जो छूट के बाद प्रभावी रूप से लगभग 29.5 रुपये पड़ेगी. इससे संकेत मिलता है कि सरकार का ध्यान आम आदमी के इस्तेमाल वाले फ्यूल पर ज्यादा है. 

एक्सपोर्ट के नियमों में क्या बदलाव हुए?

सरकार ने अब देश से बाहर पेट्रोल और डीजल भेजने (Export) के नियमों को कड़ा कर दिया है. पहले मिलने वाली टैक्स छूट अब सीमित कर दी गई है. हालांकि, भारत ने अपने पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका को भेजी जाने वाली सप्लाई पर छूट बरकरार रखी है. सरकार की प्राथमिकता अब सबसे पहले घरेलू बाजार में तेल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. 

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