July 21, 2024


Satya ke saath !! sadev !!

सावधान: चुप कराने के लिए बच्चों को न दें मोबाइल, आंखें हो जाएंगी खराब; एक बार लगा चश्मा तो नहीं हो पाती रिकवरी.

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अगर बच्चों को चुप करवाने के लिए मोबाइल थमा रहे हैं तो संभल जाएं नहीं तो जिंदगी भर पछताना पड़ेगा । हो सकता है कि आपके नौनिहाल की नजर कमजोर हो जाए और किशोरावस्था में ही मोटा चश्मा लगाना पड़े। तीन से चार साल उम्र तक बच्चों की आंखों का विकास होता है। इस दौरान यदि बच्चे मोबाइल स्क्रीन को देर तक देखते हैं तो उनकी नजरें कमजोर हो जाती हैं। इससे उनकी पास की नजर कमजोर हो जाती है, जिसे ठीक नहीं किया जा सकता। ऐसे बच्चों को चश्मा लगाने की सलाह दी जाती है। कई बार बच्चे चश्मा लगाने में लापरवाही करते हैं। नतीजतन 18 की उम्र से पहले उनकी आंखें इतनी खराब हो जाती हैं, जिसे ठीक करना संभव नहीं रहता।

If you are handing over mobiles to children to make them silent, then be careful, otherwise you will have to repent for the rest of your life. It is possible that the eyesight of your child may become weak and thick spectacles will have to be used in adolescence itself. Children’s eyes develop by the age of three to four years. During this time, if children look at the mobile screen for a long time, then their eyesight becomes weak. This weakens their near vision, which cannot be corrected. Such children are advised to wear spectacles. Sometimes children are negligent in wearing glasses. As a result, before the age of 18, their eyes become so bad that it is not possible to fix them.

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