ताइवान के पास फिर दिखी चीन की सैन्य गतिविधि, सीमा के आसपास PLA के विमान और नौसेना जहाज तैनात
ताइवान को लेकर चीन की आक्रामक नीति एक बार फिर सुर्खियों में है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से यह जानकारी साझा की है कि चीन के सैन्य लड़ाकू विमान और युद्धपोत उसकी सीमाओं के बेहद करीब मंडराते हुए देखे गए हैं। इस संभावित खतरे को देखते हुए ताइवान की सेना ने भी तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।
China Taiwan Tension : ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, द्वीप के सीमावर्ती इलाकों के आसपास चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के दो विमान और नौसेना के पांच युद्धपोतों की सक्रियता दर्ज की गई है। ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस सैन्य हलचल की पुष्टि की। समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिक ऑफ चाइना (ROC) के सशस्त्र बलों ने इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखी और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए।
चाइनीज विमान का ताइवान के ADIZ में प्रवेश
सैन्य घुसपैठ की यह ताजा घटना इस सप्ताह की शुरुआत में कई दिनों तक चली लगातार गतिविधियों के बाद सामने आई है। इससे पहले मंगलवार को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 6:00 बजे तक, ताइवानी रक्षा मंत्रालय ने अपने समुद्री और हवाई क्षेत्र के पास चार चीनी विमानों, नौ नौसैनिक जहाजों और तीन सरकारी पोतों की मौजूदगी दर्ज की थी। इन चार विमानों में से तीन ने दोनों देशों के बीच की संवेदनशील मध्य रेखा (Median Line) को पार किया और ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) के भीतर तक दाखिल हो गए।
इस सैन्य तनातनी के बीच, हाल ही में 3 जुलाई को चीन ने अमेरिका को भी नसीहत दी थी कि वह ताइवान से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता और सावधानी बरते। बीजिंग ने चेतावनी भरे लहजे में कहा था कि इस मुद्दे पर किसी भी गलत कदम के गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
चीनी राजदूत की अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत
भारत में तैनात चीन के राजदूत जू फीहोंग ने इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर बयान देते हुए बताया कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ एक उच्च स्तरीय वार्ता की है। इस द्विपक्षीय बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच के आपसी मतभेदों और गतिरोध को दूर करने, आने वाली बाधाओं को पार करने और संबंधों को सही पटरी पर बनाए रखने की जरूरत पर विशेष जोर दिया गया।
बीजिंग का दावा- ताइवान चीन का अभिन्न अंग
ताइवान पर चीन के संप्रभुता के दावे का विषय बेहद जटिल है, जिसकी पृष्ठभूमि ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तर्कों पर आधारित है। बीजिंग लगातार दुनिया के सामने यह रुख अपनाता आया है कि ताइवान चीन का ही एक अविभाज्य हिस्सा है, और यह दृष्टिकोण चीन की राष्ट्रीय व विदेश नीति का सबसे अहम केंद्र बिंदु है।
ताइवान पर चीन के दावे का इतिहास
इन सबके विपरीत, ताइवान खुद को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में देखता है। उसकी अपनी लोकतांत्रिक सरकार, खुद की मजबूत सेना और एक स्वतंत्र अर्थव्यवस्था है, जिसके दम पर वह स्वायत्त रूप से कार्य करता है। यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (USI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान की वैश्विक स्थिति अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हमेशा से एक विवादित और संवेदनशील विषय रही है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो ताइवान पर चीन का यह दावा साल 1683 से जुड़ा है, जब किंग राजवंश ने मिंग राजवंश के वफादार रहे कोक्सिंगा को पराजित कर इस द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित किया था।
