Cricketer Akshara Gupta: न पिच, न कोई अकादमी… छोटे नेट में प्रैक्टिस कर रक्सौल की बेटी बनी बिहार अंडर-19 की कप्तान
बिहार के घरेलू क्रिकेट जगत में एक नया चमकता हुआ सितारा सामने आया है। भारत-नेपाल बॉर्डर के करीब पूर्वी चंपारण के रक्सौल की रहने वाली 15 साल की युवा खिलाड़ी अक्षरा गुप्ता ने अपने असाधारण खेल और कड़ी लगन से सबका ध्यान आकर्षित किया है। रक्सौल जैसे छोटे शहर में खेल के बड़े मैदान और बुनियादी सुविधाओं की कमी होने के बाद भी, अक्षरा ने अपने घर के समीप बने एक छोटे से प्रैक्टिस नेट में पसीना बहाकर महिला क्रिकेट में ऐसा अभूतपूर्व रिकॉर्ड कायम किया है जिसकी चारों ओर सराहना हो रही है। वैभव सूर्यवंशी की शानदार सफलता के बाद अब अक्षरा गुप्ता बिहार क्रिकेट की एक नई चमक बनकर उभरी हैं।
चार आयु वर्ग में खेलकर बनाया रिकॉर्ड
अक्षरा गुप्ता ने अपने शानदार खेल कौशल के दम पर महिला क्रिकेट के एक ही सीजन के भीतर चार अलग-अलग आयु समूहों में जगह बनाई है। उन्होंने अंडर-15 वनडे, अंडर-19 टी-20, अंडर-19 वनडे और अंडर-23 टी-20 जैसे चार महत्वपूर्ण स्तरों पर खेलकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह अनूठी उपलब्धि उनके निरंतर बेहतरीन प्रदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाती है।
126 गेंदों में ठोके 306 रन
भागलपुर में 18 जून को आयोजित की गई बिहार जोनल प्रतियोगिता के दौरान अक्षरा ने महज 126 गेंदों का सामना करते हुए 306 रनों की एक यादगार और आक्रामक पारी खेली। इस विशाल स्कोर को बनाने में उन्होंने 55 बेहतरीन चौके और 8 गगनचुंबी छक्के जड़े, जहां उनका स्ट्राइक रेट 242.86 का रहा। इसके ठीक चार दिन बाद, 22 जून को उन्होंने अपने बल्ले का जौहर फिर दिखाया और 68 गेंदों में 164 रनों की तेज तर्रार पारी खेल डाली। उनके इस धमाकेदार और निरंतर फॉर्म को देखते हुए बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) ने उन्हें बिहार की महिला अंडर-19 टी-20 और वनडे दोनों टीमों की कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
चाचा ने बनाया नेट, वीडियो देखकर सीखी तकनीक
अक्षरा को इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके चाचा रामकृपा गुप्ता की मुख्य भूमिका रही है। पूर्व में खुद क्रिकेट खेल चुके रामकृपा ने अक्षरा के जुनून को देखते हुए घर के पास ही एक छोटा सा अभ्यास नेट तैयार करवाया, जहां अक्षरा रोजाना कड़ी मेहनत करती हैं। वे हर दिन करीब 5 से 6 घंटे तक अपनी बैटिंग और बॉलिंग की बारीकियों को सुधारने पर ध्यान देती हैं। बाकी बच्चों की तरह सोशल मीडिया पर वक्त गंवाने के बजाय, अक्षरा अपने खाली समय में इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों के वीडियो देखकर खेल की बारीकियों और नई तकनीकों को सीखती हैं।
परिवार को टीम इंडिया तक पहुंचने का भरोसा
अक्षरा की इस बड़ी सफलता से उनके दादा फागू साह, पिता राजकिशोर साह और माता रीना गुप्ता बेहद गौरवान्वित हैं। पूरे परिवार को यह दृढ़ विश्वास है कि अक्षरा बहुत जल्द भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नीली जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाएगी। फिलहाल, वे अक्टूबर और नवंबर के महीनों में आयोजित होने वाले आगामी राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट्स की तैयारियों में जी-जान से जुटी हुई हैं।
‘देश के लिए खेलना ही मेरा सबसे बड़ा सपना’
अपनी इस कामयाबी पर अक्षरा गुप्ता का कहना है कि उनके चाचा ही उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत (आदर्श) हैं और उनके परिवार से मिलने वाला अटूट सपोर्ट ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वे कहती हैं कि हर एक उभरते हुए खिलाड़ी की तरह उनका भी एकमात्र मुख्य लक्ष्य भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा बनकर देश के लिए गौरव हासिल करना है।
