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September 16, 2026

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धनबाद सोनारडीह हादसा: संकेत मिलते ही चेत जाता बीसीसीएल तो नहीं जाती तीन लोगों की जान

Dhanbad News: धनबाद के कतरास क्षेत्र स्थित सोनारडीह टंडाबस्ती में मंगलवार शाम हुए भू-धंसान ने एक बार फिर कोयलांचल की खतरनाक हकीकत को उजागर कर दिया. इस हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घर जमींदोज हो गए. स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके संकेत पहले से मिल रहे थे, जिसकी जानकारी बीसीसीएल प्रबंधन को दी गई थी. भू-धंसान से कई दिन पहले से ही इलाके में गैस का रिसाव हो रहा था.

पहले से मिल रहे थे खतरे के संकेत

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सोनारडीह के टंडाबस्ती में पिछले कई दिनों से जमीन के अंदर से गैस रिसाव हो रहा था. कई जगहों पर आग भी देखी जा रही थी. लोगों ने इसकी शिकायत भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के अधिकारियों से की थी. बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रबंधन सतर्क हो जाता, तो इस हादसे को टाला जा सकता था. यह लापरवाही ही तीन जिंदगियों पर भारी पड़ गई.

एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत

मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे अचानक जोरदार धमाके के साथ जमीन धंस गई. इस हादसे में मजदूर मोनू उरांव (50), उनकी बेटी गीता कुमारी (16) और बीसीसीएलकर्मी परशुराम उरांव की पत्नी सरिता देवी (45) मलबे में दब गए. बताया जाता है कि मोनू उरांव का घर करीब 20 फीट नीचे धंस गया. सरिता देवी उस समय उनके घर में मौजूद थीं, जिससे वे भी हादसे की चपेट में आ गईं. वहीं, मोनू उरांव की पत्नी छुटू देवी घटना के समय पड़ोस में थीं, जिससे उनकी जान बच गई.

कई घर जमींदोज, इलाके में मचा हड़कंप

इस हादसे में तीन घर पूरी तरह जमींदोज हो गए, जबकि तीन अन्य घर क्षतिग्रस्त हो गए. प्रभावित लोगों में गणेश रजवार, बैसाखी देवी और सुफल उरांव के परिवार शामिल हैं. घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. लोग अपने परिजनों को खोजने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए. डर और दहशत का माहौल पूरे टंडाबस्ती में फैल गया.

अवैध खनन और भूमिगत आग बना खतरे की जड़

ग्रामीणों ने इस हादसे के पीछे अवैध खनन और वर्षों से जल रही भूमिगत आग को जिम्मेदार ठहराया है. कतरास, सिजुआ और गोविंदपुर क्षेत्र में पहले भी कई बार भू-धंसान की घटनाएं हो चुकी हैं. सिजुआ क्षेत्र के 22/12 बस्ती में दो बार मस्जिद धंस चुकी है. वहीं जोगता में बजरंग बली का मंदिर भी भू-धंसान की चपेट में आकर जमीन में समा गया था. अगस्त 2023 में जोगता हरिजन बस्ती में हुए हादसे में पिता-पुत्र जमीन में धंस गए थे, जिन्हें ग्रामीणों ने किसी तरह बचाया था.

सड़क जाम और प्रशासन पर फूटा गुस्सा

हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने सोनारडीह ओपी के पास राजगंज-बोकारो फोरलेन सड़क को जाम कर दिया. इस दौरान जमकर पथराव भी हुआ, जिससे ओपी का गेट और बोर्ड क्षतिग्रस्त हो गया. लोगों ने प्रशासन और बीसीसीएल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. उनका आरोप था कि स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से क्षेत्र में अवैध खनन जारी है, जिससे जमीन कमजोर हो रही है और ऐसे हादसे हो रहे हैं.

राहत कार्य में देरी से बढ़ा आक्रोश

स्थानीय निवासियों का यह भी आरोप है कि भू-धंसान होने के बाद प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य शुरू करने में देर की गई. घटना के करीब दो घंटे बाद तक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका. अंधेरा होने के कारण भी बचाव कार्य में बाधा आई. बाद में टेंट हाउस से जनरेटर मंगाकर रोशनी की व्यवस्था की गई और रात करीब आठ बजे रेस्क्यू शुरू हुआ. इस देरी ने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया.

प्रशासन और बीसीसीएल के अधिकारी पहुंचे मौके पर

घटना की सूचना मिलते ही बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने बीसीसीएल के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से तत्काल राहत कार्य तेज करने को कहा. मौके पर कई प्रशासनिक अधिकारी और बीसीसीएल के वरिष्ठ पदाधिकारी भी पहुंचे. पुलिस और सीआईएसएफ बल की तैनाती कर स्थिति को नियंत्रण में लाया गया.

डेंजर जोन में बसी है बस्ती

बताया जाता है कि सोनारडीह टंडाबस्ती पहले से ही डेंजर जोन में चिन्हित है. यहां करीब 150 घरों में लगभग एक हजार लोग रहते हैं. इलाके में लंबे समय से गैस रिसाव और भूमिगत आग की समस्या बनी हुई है. इसके बावजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. यही कारण है कि आज भी हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर यहां रहने को मजबूर हैं.

सवालों के घेरे में बीसीसीएल और प्रशासन

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बीसीसीएल और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लगातार मिल रही चेतावनियों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. अब सवाल यह है कि आखिर कब तक कोयलांचल के लोग ऐसे ही हादसों का शिकार होते रहेंगे. क्या इस घटना के बाद प्रशासन और बीसीसीएल कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर यह हादसा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा.

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