केंद्रीय मंत्री पद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी; जानें पूरी वजह
मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्रिपरिषद से एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सिफारिश पर उनके इस इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
दरअसल, जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के तौर पर कार्यकाल पूरा हो चुका था। भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार, संसद का सदस्य न रहने की स्थिति में वह मंत्री पद पर बने नहीं रह सकते थे। इसी संवैधानिक विवशता के चलते भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता कुरियन ने मंगलवार (23 जून) को केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री के पद से अपना त्यागपत्र सौंप दिया।
राष्ट्रपति भवन की ओर से आधिकारिक बयान जारी
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राष्ट्रपति भवन की तरफ से एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की गई है। इस बयान में स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री की सलाह को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से मंजूर कर लिया है। इस मंजूरी के साथ ही केंद्र सरकार में बतौर राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल पूरी तरह समाप्त हो गया है।
जॉर्ज कुरियन कौन हैं?
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तीसरी गठबंधन सरकार में राज्य मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वह केरल में भाजपा के एक बेहद वरिष्ठ और कद्दावर नेता माने जाते हैं, जो साल 1980 में पार्टी की स्थापना के समय से ही इसके साथ मजबूती से जुड़े रहे हैं। राजनीति के मैदान के अलावा, वह कानून के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में एक वकील के रूप में अपनी पहचान रखते हैं।
चूंकि हाल ही में उनका राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया था और पार्टी द्वारा उन्हें दोबारा संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) नहीं भेजा गया, इसलिए उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी सुगबुगाहट है कि केरल विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने के कारण भी उन्हें दोबारा मौका नहीं मिला।


