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August 17, 2026

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चीन की अकड़ कम करने साथ आए भारत-अमेरिका, Rare Earth सप्लाई चेन पर की बड़ी साझेदारी

दुर्लभ खनिजों पर भारत-अमेरिका में महाडील, सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए क्वॉड देशों की बड़ी रणनीतिक पहल

वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) और दुर्लभ तत्वों (Rare Earth Elements) को लेकर बढ़ती होड़ के बीच भारत और अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने इन जरूरी संसाधनों की माइनिंग, प्रोसेसिंग और आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए एक द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को इस ऐतिहासिक फैसले की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह महत्वपूर्ण समझौता द्विपक्षीय वार्ताओं और क्वॉड (Quad) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद संपन्न हुआ है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका ने दुर्लभ खनिजों के खनन और प्रसंस्करण से जुड़ी आपूर्ति को अधिक सुरक्षित व सुदृढ़ बनाने के लिए एक अहम फ्रेमवर्क तैयार किया है। उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इसे एक बेहद जरूरी कदम बताया। उन्होंने कहा कि क्वॉड की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से गूंजा, और आज के समय में इस तरह के गठजोड़ की प्रासंगिकता समान विचारधारा वाले देशों के बीच पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

सप्लाई चेन से लेकर निवेश तक होगा सहयोग

इस नए द्विपक्षीय समझौते का मुख्य उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन के प्रत्येक चरण में आपसी तालमेल को बढ़ाना है। इसके अंतर्गत खनन, प्रसंस्करण (Processing), रिसाइक्लिंग और इस क्षेत्र से जुड़े निवेशों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विदेश मंत्री के अनुसार, यह नई साझेदारी एक बेहद मजबूत और विविध आपूर्ति श्रृंखला खड़ी करने में मदद करेगी। इसके साथ ही दोनों राष्ट्र मिलकर इन खनिजों के वित्तीय प्रबंधन (Financing) पर भी काम करेंगे। उन्होंने इसे भारत और अमेरिका के प्रगाढ़ होते रिश्तों का प्रमाण बताते हुए कहा कि यह वैश्विक चुनौतियों और अवसरों के बीच दोनों देशों के करीबी जुड़ाव को दिखाता है।

मार्को रूबियो बोले- भारत अमेरिका के लिए बेहद अहम

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी इस रणनीतिक समझौते का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के अटूट रिश्तों की एक नई मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई दिनों से भारत-अमेरिका रणनीतिक गठबंधन की महत्ता को रेखांकित कर रहे हैं और यह समझौता उसी दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है।

रूबियो ने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका दोनों के भविष्य के रणनीतिक हित इस बात पर टिके हैं कि वे दीर्घकाल तक इन महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित कर सकें। नई तकनीकों और नवाचार (Innovation) पर आधारित अर्थव्यवस्थाओं के विकास के लिए यह आपूर्ति बेहद आवश्यक है।

क्यों अहम हैं क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ?

आज की अत्याधुनिक डिजिटल और औद्योगिक दुनिया में क्रिटिकल मिनरल और रेयर अर्थ एलिमेंट्स रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। इनका उपयोग एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा तकनीक (Clean Energy Tech), रक्षा प्रणालियों (Defense Systems) और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के निर्माण में बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है। वैश्विक पटल पर इन संसाधनों की सुचारू उपलब्धता को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं, क्योंकि वर्तमान में रेयर अर्थ की प्रोसेसिंग और बाजार पर अकेले चीन का वर्चस्व है। यही कारण है कि भारत, अमेरिका और उनके सहयोगी देश अब एक ऐसी विविध सप्लाई चेन विकसित कर रहे हैं जिससे वैश्विक निर्भरता किसी एक देश पर सीमित न रहे।

चीन की निर्भरता कम करने की रणनीति

भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ व्यापारिक महत्व का नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीतिक सोच है। भारत और अमेरिका लंबे समय से दुर्लभ खनिजों के मामले में चीन पर अपनी अत्यधिक निर्भरता को कम करने के विकल्प तलाश रहे थे, क्योंकि चीन द्वारा अक्सर इन खनिजों की आपूर्ति को कूटनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह नई रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में दोनों देशों के बीच प्रौद्योगिकी, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग की एक नई इबारत लिखेगी।

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