झाड़ग्राम के रहने वाले जगन्नाथ ने दिव्यांगता को मजबूरी नहीं हिम्मत बनाया, कोल्हान के प्रसिद्ध हरिणा मेले में किया अद्भुत कला का प्रदर्शन, देखें VIDEO
दिव्यांग ने अपने कला के बल पर मंदिर पहुंचने से पहले भक्तों को मानो कुछ देर अपने पास रोक लिया, सभी ने एक स्वर में कहा वाह उस्ताद वाह, जगन्नाथ ने दिव्यांगता को मजबूरी नहीं हिम्मत बनाया…
पोटका : कोल्हान का प्रसिद्ध हरिणा मेला जो रोजो संक्रांति में 5 दिनों तक लगने वाले इस मेले में पिछले 10 सालों से बंगाल के झाड़ग्राम स्थित गोपीबल्लापुर के रहने वाले जगन्नाथ बेरा रोजगार के लिए प्रतिवर्ष बस मार्ग से हरिणा पहुंचते हैं वहीं जगन्नाथ बेरा दोनों हाथों से दिव्यांग है। मगर कला का वह अनुपम भेट लोगों को दिया जो सभी ने एक स्वर में कहा वाह उस्ताद वाह।

यानी एक स्वस्थ मनुष्य भी एक साथ ढोलक, झाल एवं करताल का ऐसा ताल प्रस्तुत किया जिसे देखते ही आप दंग रह जायेंगे। दिव्यांग होते हुए भी दोनों हाथों से मजबूर जगन्नाथ ने समाज के समक्ष अपने मजबूरी को प्रकट नहीं किया और अपने हौसले और हिम्मत को हथियार बनाया। बंगाल में ही कला का प्रशिक्षण लेकर आज कई राज्यों में लगने वाले मेले में अपने जीविका उपार्जन के लिए मेले में जाकर जगह-जगह कला का प्रदर्शन करते हैं और रोजगार कर रहे हैं।

वहीं अपने शब्दों में जगन्नाथ ने कहा कि मुझे सरकारी सहयोग के रूप में मात्र ₹1000 प्रतिमाह बंगाल सरकार देती है। मगर अन्य सुविधाओं से महरूम हुँ। मुझे इसका मलाल नहीं मगर जब तक मेरे शरीर में जान है मैं कला के माध्यम से समाज को सीख एवं हिम्मत देते हुए उन्हें यह सीख दे जाऊंगा की दिव्यंगता मजबूरी नहीं आप कौशल के माध्यम मुकाम पा सकते हैं। अपना जीविका उपार्जन कर सकते हैं। आगे बढ़ सकते हैं।

वहीं इस समाज के लोगों को कला का अनुपम भेंट देते हुए जगन्नाथ उन दिव्यांगों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गए कि आप दिव्यांग हो मन से दिव्यांग मत बनो आगे बढ़ो और अपने हुनर के बल पर रोजगार कर समाज में एक नया स्थान कायम करो, जिससे दिव्यांग समाज भी आगे बढ़े और रोजगार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाये।

जगन्नाथ के कला को देखने के लिए लोगों का जमावड़ा लगातार जमा रहा और उनके कला का सभी ने प्रशंसा की। कहा कि इस तरह कलाकार अनुपम उपहार कम देखने को मिलता है। ऐसे कलाकारों को संजोए रखने की आवश्यकता है। वही जगन्नाथ अपने कला के बल पर रोज हजारों रुपए कमा लेता है।
