झारखंड के 19 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 23 मई तक खराब रहेगा मौसम
मुख्य बिंदु: इस साल झारखंड के मौसम चक्र में काफी उलटफेर देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आने वाले दिनों के लिए राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधियों, गरज-चमक के साथ बारिश और आकाशीय बिजली गिरने (वज्रपात) को लेकर चेतावनी जारी की है।
झारखंड में बदलता मौसम का मिजाज
झारखंड में वैश्विक जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) का सीधा असर साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है। इस वर्ष 1 मार्च के बाद से ही मौसम का मिजाज काफी असामान्य बना हुआ है। मई के जिस महीने में अमूमन लोगों को भीषण और झुलसाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ता था, उस दौरान राज्य के कुल 24 में से 19 जिलों में सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस बेमौसम वर्षा के चलते राज्य भर में अधिकतम तापमान सामान्य स्तर से नीचे बना हुआ है, जिससे लोगों को फिलहाल चिलचिलाती धूप और लू से बड़ी राहत मिली है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अप्रैल महीने की शुरुआत में राज्य के कई हिस्सों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया था, जिससे कड़ाके की गर्मी के आसार दिख रहे थे। हालांकि, उसके बाद मौसम ने अचानक करवट ली। अब मई के इस पखवाड़े में चुनिंदा दो-तीन जिलों को छोड़कर कहीं भी तापमान 40 डिग्री से ऊपर नहीं गया है। वर्तमान में राज्य का औसत अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के इर्द-गिर्द बना हुआ है।

जिलों में बारिश का हाल
राज्य के 6 प्रमुख जिलों—रांची, बोकारो, हजारीबाग, लातेहार, रामगढ़ और सिमडेगा में इस सीजन में सामान्य के मुकाबले 100 प्रतिशत से भी अधिक वर्षा रिकॉर्ड की जा चुकी है। इसके विपरीत, चतरा, गढ़वा, लोहरदगा और साहिबगंज ऐसे जिले हैं जहां अब तक औसत से कम बारिश दर्ज हुई है।
मई के अंतिम सप्ताह तक बदला रहेगा मौसम
रांची स्थित मौसम केंद्र द्वारा जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, मई महीने के आखिरी हफ्ते तक मौसम का यह बदला हुआ रूप बरकरार रहने की संभावना है। आगामी 23 मई तक प्रदेश के विभिन्न इलाकों में धूल भरी आंधियां चलने, बादल गरजने और वज्रपात के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार जताए गए हैं। विशेष रूप से 19 और 20 मई को संताल परगना, मध्य झारखंड के जिलों और राजधानी रांची व उसके आस-पास के क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है।
मौसम विशेषज्ञ के अनुसार
रांची मौसम केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि झारखंड में दिख रहा यह बदलाव मुख्य रूप से पर्यावरण परिवर्तन और कुछ अन्य स्थानीय मौसमी प्रणालियों के कारण है। यही वजह है कि पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति एक जैसी नहीं है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि पहले होने वाली सामान्य बारिश में जोखिम कम होता था, लेकिन अब आंधी-तूफान, भारी बारिश और बिजली गिरने जैसी विनाशकारी घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। दिन की शुरुआत तेज धूप से होती है, लेकिन दोपहर बाद अचानक मौसम बिगड़ जाता है। मौसम वैज्ञानिक ने आम जनता से अपील की है कि वे आसमान में बादल छाने या मौसम खराब होने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। वज्रपात के समय मोबाइल या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग न करें और खुले में सेल्फी लेने जैसी लापरवाही से पूरी तरह बचें।
