JPSC परीक्षा गड़बड़ी: अभ्यर्थियों के दस्तावेज व ब्लैंक चेक कोचिंग संचालकों तक कैसे पहुंचे? CID की तफ्तीश तेज
मुख्य बातें:
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के आरोपों को लेकर CID की कार्रवाई जारी है। पांच जिलों में की गई छापेमारी के बाद अब विभिन्न कोचिंग संचालकों तथा अन्य संदिग्धों से गहन पूछताछ की जा रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों से अहम सुराग मिलने की संभावना जताई जा रही है।
रेड के बाद CID की पूछताछ में तेजी
JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी की टीम ने 5 जिलों के 18 अलग-अलग स्थानों पर हाल ही में रेड मारी थी। छापेमारी में मिले दस्तावेजों व साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी ने पूछताछ का दायरा बढ़ा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, धनबाद व हजारीबाग क्षेत्र से कोचिंग संचालक आदित्य पांडेय, लालू यादव और प्रदीप यादव को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। इसके अलावा टीडीपीएल (TDPL) कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी और JPSC के प्रोग्रामर उस्मान से भी पूछताछ की जा रही है।
सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि अभ्यर्थियों के नाम पर जारी ब्लैंक चेक, एडमिट कार्ड, मार्कशीट और OMR शीट की कार्बन कॉपियां इन कोचिंग संचालकों व अन्य बिचौलियों तक कैसे पहुंचीं और इन्हें रखने का वास्तविक उद्देश्य क्या था।
कोचिंग संस्थानों की भूमिका की जांच
जांच एजेंसी कोचिंग सेंटरों की कार्यप्रणाली और TDPL से जुड़े लोगों की संदिग्ध गतिविधियों को खंगाल रही है। अधिकारी इस बात की तहकीकात कर रहे हैं कि कोचिंग संस्थानों का संपर्क परीक्षा का संचालन करने वाली प्रणाली से किस तरह स्थापित हुआ। इसके साथ ही उन अभ्यर्थियों का भी विवरण जुटाया जा रहा है, जिनके हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक रेड के दौरान बरामद हुए हैं।
नौकरी के बाद भुगतान की आशंका
सीआईडी इस बिंदु पर भी जांच केंद्रित कर रही है कि क्या अभ्यर्थियों से चयन हो जाने के बाद पैसे या अचल संपत्ति (जमीन) देने का कोई गुप्त करार किया गया था। बरामद किए गए बैंक रिकॉर्ड्स और संपत्ति के कागजातों का मिलान अभ्यर्थियों की जानकारी से किया जा रहा है। जांच टीम यह समझ रही है कि जब्त जमीन के दस्तावेजों का इस धांधली में क्या उपयोग किया जाना था। हालांकि, सीआईडी ने अभी तक इन बरामदगियों के आधिकारिक विवरण की पुष्टि नहीं की है।
पूछताछ के बाद आगे बढ़ेगी जांच
सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, सभी संदिग्धों और आरोपियों के बयानों का मिलान छापेमारी में जब्त इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स, चेक बुक्स और अभ्यर्थियों के ओरिजिनल कागजातों से कराया जाएगा। बयानों के सत्यापन के पश्चात ही मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अन्य संलिप्त लोगों के नाम सामने आएंगे। फिलहाल एजेंसी ने जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए आधिकारिक तौर पर विस्तृत ब्यौरा साझा नहीं किया है।
