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August 10, 2026

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जेपीएससी परीक्षा घोटाला: दो करोड़ रुपये और 20 फीसदी कमीशन पर डील, सीआईडी की जांच तेज

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी गड़बड़ी और रिश्वतकांड मामले में सीआईडी की तफ्तीश में बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में गिरफ्तार टीडीपीएल (TDPL) कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान बताया कि जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को परीक्षा संचालन का काम सौंपने के बदले दो करोड़ रुपये नकद और प्रत्येक भुगतान में 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी दी गई थी।

अभय तिवारी के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष तक पहुंच बनाने और इस सौदे को अंजाम देने में कंप्यूटर प्रकोष्ठ के पूर्व कर्मी धर्मेंद्र ने मुख्य बिचौलिए की भूमिका निभाई थी। सीआईडी अब इस बयान के आधार पर अपनी जांच का दायरा और बढ़ा रही है।

जेपीएससी में टीडीपीएल कंपनी का प्रवेश

सीआईडी को दिए गए बयान में अभय तिवारी ने बताया कि जून महीने में उसने टीडीपीएल के दो निदेशकों—रामवीर सिंह और सत्यपाल—का परिचय धर्मेंद्र से कराया था। इसके बाद दोनों निदेशकों, बोकारो निवासी सानंद प्रकाश और पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते की एक प्रमुख होटल के रेस्तरां में बैठक आयोजित की गई।

इस मुलाकात के दौरान पूर्व अध्यक्ष ने कंपनी को आयोग के समक्ष अपना प्रेजेंटेशन पेश करने का निर्देश दिया। होटल में हुई बैठक के दो दिनों बाद टीडीपीएल ने जेपीएससी मुख्यालय में प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें आयोग के सदस्य और उप परीक्षा नियंत्रक मौजूद थे। प्रेजेंटेशन देखने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष ने प्रस्ताव को आगे की प्रक्रिया के लिए उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के पास भेज दिया और कंपनी के निदेशक को धर्मेंद्र से संपर्क में रहने की सलाह दी।

चार प्रमुख शर्तों पर बनी सहमति और 20% हिस्सेदारी तय

प्रस्तुतीकरण के बाद मोरहाबादी मैदान के पास टीडीपीएल निदेशक रामवीर सिंह और अभय तिवारी की मुलाकात धर्मेंद्र से हुई, जहां ठेका देने के बदले चार शर्तें रखी गईं:

  1. पूर्व अध्यक्ष के लिए भुगतान: जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष को दो करोड़ रुपये की नकद राशि दी जाएगी।
  2. बिचौलिए का शुल्क: धर्मेंद्र को खुद के लिए 25 लाख रुपये की रकम दी जाएगी।
  3. परिणाम में सांठगांठ: आयोग द्वारा बताए गए कुछ चिन्हित अभ्यर्थियों को परीक्षा में उत्तीर्ण कराना होगा।
  4. कमीशन की भागीदारी: जेपीएससी से टीडीपीएल को मिलने वाले हर भुगतान में से 20 प्रतिशत हिस्सा अध्यक्ष को देना होगा।

कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह ने इन सभी शर्तों को स्वीकार कर लिया। इसके बाद धर्मेंद्र ने उन्हें स्टेट गेस्ट हाउस में एल. खियांग्ते से मिलवाया, जहां पूर्व अध्यक्ष ने धर्मेंद्र के माध्यम से ही आगे का संपर्क बनाए रखने को कहा। इसके तुरंत बाद जून माह में ही टीडीपीएल के साथ अनुबंध कर लिया गया और परीक्षाओं के संचालन का कार्यभार सौंप दिया गया।

अभय तिवारी के बयान के बाद सीआईडी की छापेमारी

अभय तिवारी द्वारा दिए गए इस विस्तृत बयान के तुरंत बाद सीआईडी की टीम एक्शन मोड में आ गई। जांच एजेंसी ने सानंद प्रकाश, धर्मेंद्र और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसके दौरान धर्मेंद्र को हिरासत में ले लिया गया। सीआईडी अब इस मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों के साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।

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