JPSC घोटाला: 80 लाख में नौकरी का सौदा, अभ्यर्थी ने एजेंट को पिता के खाते से भेजे थे 16 लाख, CID के सामने खोला राज
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती प्रक्रिया में हुई धांधली की पड़ताल कर रही CID को हिरासत में लिए गए आरोपियों की पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। मामले में उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा (PT) में सफलता पाने वाले परीक्षार्थी सुमन सौरभ ने अलग-अलग खुलासे किए हैं। पूछताछ के दौरान श्वेता गुप्ता ने परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की बात तो कबूली, लेकिन इसका पूरा श्रेय पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते के निर्देशों को दिया।
80 लाख में तय हुआ था सौदा
हजारीबाग जिले के बड़कागांव के रहने वाले गिरफ्तार परीक्षार्थी सुमन सौरभ ने जांच अधिकारियों को बताया कि 14वीं JPSC परीक्षा में अंतिम चयन सुनिश्चित कराने के लिए एजेंट पवन सिंह के साथ कुल 80 लाख रुपये की डील हुई थी। तय सौदे के अनुसार, 20 लाख रुपये पीटी परीक्षा से पूर्व, 40 लाख रुपये मुख्य परीक्षा (Mains) से पहले और बाकी 20 लाख रुपये इंटरव्यू की प्रक्रिया से पहले दिए जाने थे।
2 बार JPSC और 1 बार JSSC में हुआ था फेल
सौरभ ने अपनी पूछताछ में स्वीकार किया कि वर्ष 2020 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वह दो बार JPSC और एक बार JSSC CGL की परीक्षा में असफल हो चुका था। असफलता के बाद, अपने मित्र दिवाकर के रिश्तेदार प्रकाश कुमार के माध्यम से उसकी मुलाकात एजेंट पवन सिंह से हुई। एजेंट ने उसे सलाह दी थी कि परीक्षा हॉल में जितने प्रश्नों के उत्तर निश्चित पता हों केवल वही भरें और बाकी उत्तर पुस्तिका (OMR Sheet) को खाली छोड़ दें।
OMR शीट सोशल मीडिया पर वायरल
19 अप्रैल 2026 को बोकारो परीक्षा केंद्र पर आयोजित 14वीं JPSC (PT) परीक्षा के दौरान सौरभ ने दोनों पेपरों में केवल 38 और 48 प्रश्न ही हल किए थे। परीक्षा समाप्त होने के उपरांत उसने अपने पिता के बैंक अकाउंट से एजेंट पवन के एक्सिस बैंक खाते में 4 अलग-अलग किस्तों के जरिए 12 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद 2 जुलाई 2026 को पीटी का परिणाम जारी होने पर उसने 4 लाख रुपये और भेजे, यानी कुल 16 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था। हालांकि, सोशल मीडिया पर उसकी OMR शीट वायरल होने के बाद पूरा मामला उजागर हो गया। फिलहाल सीआईडी दोनों के बैंक खातों का ब्योरा खंगाल रही है।
अध्यक्ष के कहने पर तैयार किया परिणाम
इधर सीआईडी की रिमांड में पूछताछ का सामना कर रही उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने खुद को निर्दोष बताया है। उसने दावा किया कि तत्कालीन अध्यक्ष एल खियांग्ते के स्पष्ट आदेश पर ही उसने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा का रिजल्ट तैयार कर उसे जारी किया था। उसने यह भी बताया कि दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी उपसचिव सरोजनी तिर्की की अध्यक्षता वाली समिति की थी, जबकि अंतिम परिणाम आयोग के सदस्यों (डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद और डॉ. अनिमा हांसदा) को समीक्षा के लिए भेजा गया था।


