June 17, 2024

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खरसावां।भारत के विभिन्न प्रदेशों की रंग बिरंगी कला और संस्कृति को एक सूत्र में बांधते हुए चैत्रपर्व- छऊ महोत्सव 2024 विदा हुई

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भारत के विभिन्न प्रदेशों की रंग बिरंगी कला और संस्कृति को एक सूत्र में बांधते हुए चैत्रपर्व- छऊ महोत्सव 2024 विदा हुई । लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता का पालन करते हुए कार्यक्रम का आयोजन में प्रशासनिक पदाधिकारी को थोड़ी मुश्किल जरूर हुई परंतु यह पर्व और महोत्सव यहां की संस्कृति से जुड़ी हुई है, जिसके कारण जिला प्रशासन द्वारा आचार संहिता का गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए नृत्य एवं धार्मिक अनुष्ठान का निर्वाह किया गया ।

जिला मुख्यालय सरायकेला के बिरसा मुंडा स्टेडियम में पिछले तीन दिनों से चली आ रही महोत्सव का समापन आज शाम हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन शनिवार की शाम 50 मिनट की एक नृत्य “गरुड़ महानायक” पेश की गई।इंडोनेशिया के ‘फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया’ में धूम मचाने वाली यह नृत्य पहली बार महोत्सव में पेश की जा रही है। इसमें सरायकेला, खरसावां एवं मानभुम छऊ की तीनों शैलियों को समावेश किया गया है। इस नृत्य की कोरियोग्राफी पद्मश्री ससधर आचार्य की है।एक खास बातचीत में पद्मश्री ससधर आचार्य ने कहा है कि गरुड के कैरेक्टर पर पूरा नृत्य आधारित है।

गरुड़ उत्पत्ति से अंत तक गरुड़ की क्रियाकलापों को इस नृत्य के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाया गया है। इसमें गरुड़ भास्कर, गरुड वासुकी, गरुड वाहन, नरकासुर बोध पर आधारित है। उन्होंने कहा कि पूरी नृत्य 50 मिनट की है।इस अवधि में कहीं भी ब्रेक नहीं है। श्री आचार्य ने एक विशेष सवाल में कहा है कि इस तरह कि यह पहले नृत्य है जिसमें दर्शकों को 50 मिनट कुर्सी पर जडे रहें। इस नृत्य में 14 कलाकार स्टेज पर परफॉर्म किया है। लाइटिंग एवं ध्वनि यंत्र इस नृत्य में खास है।

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