ऑपरेशन टाइगर… क्या फिर टूटेगी उद्धव की शिवसेना? 6 सांसदों पर शिंदे की नजर, बचाने उतरे संजय राउत
Maharashtra Politics Operation Tiger: महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में एक बार फिर भारी उठापटक के संकेत मिल रहे हैं. आरोप लग रहे हैं कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का खेमा उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों और विधायकों में सेंधमारी करने की कोशिश में है. इस संभावित संकट से अपनी पार्टी को सुरक्षित रखने के लिए शिवसेना यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कमान संभाल ली है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है यह ‘ऑपरेशन टाइगर’ और इसके पीछे की पूरी राजनीतिक कहानी.
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर किसी बड़े सियासी भूचाल की सुगबुगाहट तेज हो गई है. चर्चाएं हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है और पार्टी में एक बार फिर विभाजन हो सकता है. सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना विपक्षी खेमे के सांसदों और विधायकों को अपने पाले में खींचने के लिए सक्रिय है. राजनीतिक हल्कों में चोरी-छिपे चलाए जा रहे इस अभियान को ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया जा रहा है.
ठाकरे की बैठक से शुरू हुई अटकलें
इस पूरे घटनाक्रम को हवा तब मिली जब उद्धव ठाकरे ने मुंबई में अपने निजी आवास पर पार्टी के सभी सांसदों की एक आवश्यक बैठक बुलाई थी. हैरान करने वाली बात यह रही कि इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 सांसदों में से सिर्फ 4 ही शामिल होने पहुंचे. 5 सांसदों की इस अनुपस्थिति के बाद से ही पार्टी के भीतर आंतरिक असंतोष और बगावत की अटकलों ने जोर पकड़ लिया.
शिंदे गुट से जुड़े नेताओं का दावा है कि उद्धव कैंप के कम से कम 6 सांसद एक नया समूह बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो ये सांसद जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक पत्र सौंप सकते हैं, जिसके बाद वे आधिकारिक तौर पर शिंदे गुट के संसदीय दल का हिस्सा बन जाएंगे.
किन सांसदों के नाम चर्चा में?
जिन सांसदों के पाला बदलने की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें परभणी से सांसद संजय जाधव, शिर्डी से भाऊसाहेब वाकचौरे, यवतमाल से संजय देशमुख और हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर के नाम मुख्य रूप से शामिल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और मुंबई नॉर्थ-ईस्ट से संजय पाटिल के नाम भी इस लिस्ट में होने का दावा किया जा रहा है.
हालांकि, अभी तक इन अटकलों की आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार देर रात तक ओमराजे निंबालकर और संजय पाटिल के रुख को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं थी, लेकिन उनकी शिंदे गुट के नेताओं के साथ लगातार चर्चा जारी होने की खबरें हैं. वहीं, हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, संजय जाधव, संजय देशमुख और भाऊसाहेब वाकचौरे मंगलवार को दिल्ली पहुंच चुके थे और उन्होंने पार्टी आलाकमान के फोन कॉल्स का भी कोई जवाब नहीं दिया.
ठाकरे के साथ कौन-कौन?
राजनीतिक समीक्षकों के मुताबिक, इस मुश्किल घड़ी में भी जो सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं, उनमें मुंबई दक्षिण से अरविंद सावंत, मुंबई दक्षिण मध्य से अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे शामिल हैं. तकनीकी रूप से देखें तो अगर कुल 9 में से 6 सांसद पाला बदलते हैं, तो यह संख्या कुल सांसदों की दो-तिहाई हो जाएगी. ऐसी स्थिति में उन पर दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू नहीं होगा और वे अयोग्यता की कार्रवाई से आसानी से बच जाएंगे.
नुकसान रोकने में जुटे उद्धव ठाकरे
मामले की गंभीरता को भांपते हुए उद्धव ठाकरे ने तुरंत डैमेज कंट्रोल (नुकसान रोकने की कवायद) शुरू कर दिया है. उन्होंने पार्टी के संकटमोचक माने जाने वाले संजय राउत और वरिष्ठ नेता अरविंद सावंत को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. इन दोनों नेताओं को नाराज और संपर्क से बाहर चल रहे सांसदों से व्यक्तिगत रूप से बात कर उन्हें मनाने का जिम्मा दिया गया है. इसके साथ ही खुद उद्धव ठाकरे भी लगातार इन नेताओं से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं ताकि पार्टी को एक और बड़ी टूट से बचाया जा सके.


