March 1, 2024

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प्रकाश मेहरा : अपने नाना के मात्र 13 रुपये चुराकर पहुंचे थे मुंबई, नाई की दुकान पर किया काम, अमिताभ बच्चन को तब जाकर उनकी अपनी 5 फिल्मों ने बनाया महानायक

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प्रकाश मेहरा : अपने नाना के मात्र 13 रुपये चुराकर पहुंचे थे मुंबई, नाई की दुकान पर किया काम, अमिताभ बच्चन को तब जाकर उनकी अपनी 5 फिल्मों ने बनाया महानायक*

*नयी दिल्ली :* अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘आनंद’ को छोड़ दें तो उनकी शुरुआती 8-9 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थीं. इंडस्ट्री में उनकी इमेज खराब हो चुकी थी, लेकिन वे मुंबई छोड़ने से पहले खुद को एक और चांस देना चाहते थे और यह मौका दिया बॉलीवुड के एक ऐसे डायरेक्टर ने, जो कभी अपने नाना के 13 रुपये चुराकर बिजनौर से मुंबई आए थे और नाई की दुकान पर काम कर चुके थे. दोनों को एक-दूसरे की जरूरत थी.अमिताभ बच्चन की शुरुआती फिल्में फ्लॉप रही थी
उत्तर प्रदेश के बिजनौर से जब एक छोटा बालक नाना की तिजोरी से 13 रुपये चुराकर मुंबई आया, तो सपनों का सागर उसकी आंखों के सामने तैर रहा था. रेडियो पर बॉलीवुड के गाने सुनते-सुनते फिल्मों में काम करने का जुनून मुंबई खींच तो लाया, पर छोटे बच्चे को भला कौन क्या काम देता? तब बिजनौर के ही रहने वाले कल्लू नाई ने उन्हें अपने यहां काम करने का मौका दिया. बालक के नाना उसे ढूंढते हुए मुंबई पहुंचे और उसे वापस घर ले आए, पर फिल्मों में काम करने का जुनून बालक को चैन नहीं लेने दे रहा था. वे कुछ दिन बाद फिर मुंबई आ गए. वह बालक बड़ा होकर बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों में से एक बना, नाम है- प्रकाश मेहरा.
अमिताभ बच्चन को महानायक बनाने का श्रेय प्रकाश मेहरा को ही जाता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म निर्देशक के ममेरे भाई ने प्रकाश मेहरा के बचपन और संघर्षों के बारे में कई खुलासे किए थे. डायरेक्टर के भाई राजेश खन्ना ने कभी बताया था कि जब वे नाई की दुकान पर काम करते थे, तब उनकी कुछ निर्माता-निर्देशकों से पहचान बन गई थी. उन्हें फिल्में लिखने का मौका मिला. वह भी समय आया, जिसका उन्हें बरसों से इंतजार था. उन्हें 1972 में ‘समाधि’ और ‘मेला’ जैसी फिल्मों का निर्देशन करने का अवसर मिला.
प्रकाश मेहरा बॉलीवुड के सबसे सफल निर्देशकों में से एक रहे हैं.
प्रकाश मेहरा कुछ बड़ा करने की सोच रहे थे. किसी तरह दोस्त से 25 हजार रुपये मिले, तो फिल्म निर्देशित करने के साथ-साथ उसे प्रोड्यूस करने का मन बना लिया. उस समय अमिताभ बच्चन के सितारे गर्दिश में थे. उनकी फिल्में एक के बाद एक फ्लॉप हो रही थीं. फिल्म निर्देशक और निर्माता उनसे दूर भागने लगे थे.
*फिल्म ‘जंजीर’ रिलीज होने के बाद अमिताभ बच्चन की किस्मत बदली.*
अमिताभ बच्चन खुद को एक और चांस देना चाहते थे. तब उनकी मुलाकात प्रकाश मेहरा से हुई. दोनों के करियर को एक-दूसरे का सहारा चाहिए था. फिल्म ‘जंजीर’ के लिए दोनों साथ आए. फिल्म रिलीज होने के बाद दोनों के सितारे बुलंदी पर पहुंच गए. फिल्म सुपरहिट रही. इस जोड़ी को आगे भी खुद को साबित करना था.
अमिताभ और प्रकाश मेहरा की जोड़ी ने फिर 1976 में रिलीज हुई ‘हेरा फेरी’ में कमाल दिखाया, जिसमें विनोद खन्ना के साथ बिग बी दर्शकों को काफी भाए थे. डायरेक्टर प्रकाश मेहरा ने फिर अपनी अगली फिल्मों ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘नमक हलाल’ और ‘शराबी’ में भी अमिताभ बच्चन को लीड रोल दिया. इन 5 फिल्मों ने अमिताभ बच्चन को महानायक का दर्जा दिलाया और प्रकाश मेहरा बॉलीवुड के सबसे सफल डायरेक्टर्स में से एक बन गए. फिल्म निर्देशक का 2009 में निमोनिया और अंगों में खराबी आने की वजह से निधन हो गया था, वहीं 80 साल के अमिताभ बच्चन अभी भी फिल्मों में काम कर रहे हैं.

 

New Delhi: Except Amitabh Bachchan’s film ‘Anand’, his initial 8-9 films were flops at the box office. His image in the industry was tarnished, but before leaving Mumbai, he wanted to give himself another chance and this opportunity was given by a Bollywood director who had once stolen 13 rupees from his maternal grandfather and came to Mumbai from Bijnor and went to the barber shop. Worked at the shop. Both needed each other. Amitabh Bachchan’s early films were flops.
When a small boy from Bijnor in Uttar Pradesh came to Mumbai after stealing 13 rupees from his maternal grandfather’s safe, an ocean of dreams was floating in front of his eyes. The passion of working in films while listening to Bollywood songs on the radio pulled Mumbai, but who would give a small child any work? Then Kallu Nai, a resident of Bijnor, gave him an opportunity to work at his place. The boy’s maternal grandfather reached Mumbai in search of him and brought him back home, but the passion of working in films was not letting the boy rest. He came back to Mumbai after a few days. That boy grew up to become one of the most successful directors of Bollywood, Prakash Mehra.
The credit goes to Prakash Mehra for making Amitabh Bachchan a superhero. According to media reports, the maternal brother of the film director had made many revelations about Prakash Mehra’s childhood and struggles. The director’s brother Rajesh Khanna once told that when he used to work at the barber shop, he had become acquainted with some producer-directors. He got a chance to write films. The time also came, for which he was waiting for years. He got the opportunity to direct films like ‘Samadhi’ and ‘Mela’ in 1972.
Prakash Mehra has been one of the most successful directors of Bollywood.
Prakash Mehra was thinking of doing something big. Somehow I got 25 thousand rupees from a friend, so along with directing the film, I made up my mind to produce it. At that time Amitabh Bachchan’s stars were in decline. His films were flopping one after the other. Film directors and producers started running away from him.
Amitabh Bachchan’s luck changed after the release of the film ‘Zanjeer’.
Amitabh Bachchan wanted to give himself another chance. Then he met Prakash Mehra

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