पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा का भव्य शुभारंभ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर रवाना हुए महाप्रभु
1. आस्था का उमड़ा जनसैलाब (Introduction)
ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का आधिकारिक आगाज हो चुका है। भगवान जगन्नाथ, अपने अग्रज बलभद्र और लाडली बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक और पावन क्षण का दीदार करने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पुरी धाम पहुंची है। चारों तरफ ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरि बोल’ के नारों की गूंज से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।
2. पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हुई यात्रा (Rituals & Procession)
महाप्रभु की इस पावन यात्रा से पहले मंदिर परिसर में कई सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं और अनुष्ठान संपन्न किए गए। मंगला आरती और विशेष पूजा-अर्चना के बाद, भगवान के विग्रहों को गर्भगृह से बाहर लाकर उनके भव्य रथों पर विराजमान किया गया। इस विशेष अनुष्ठान को ‘पहांडी’ कहा जाता है, जिसे देखने के लिए भक्तों में भारी उत्साह नजर आया। इसके बाद पुरी के राजा द्वारा ‘छेरा पहरा’ (सोने की झाड़ू से रथों की सफाई) की रस्म अदा की गई, जिसके बाद रथों को खींचने का काम शुरू हुआ।
3. तीनों रथों की अनोखी विशेषता (Features of the Chariots)
भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन के लिए तीन विशालकाय और आकर्षक काष्ठ (लकड़ी) के रथ तैयार किए गए हैं।
- भगवान जगन्नाथ के रथ को ‘नंदीघोष’ कहा जाता है।
- भाई बलभद्र के रथ का नाम ‘तालध्वज’ है।
- बहन सुभद्रा के रथ को ‘दर्पदलन’ या ‘पद्मध्वज’ के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालुओं में इन पवित्र रथों की रस्सियों को छूने और खींचने की होड़ मची हुई है, क्योंकि मान्यता है कि रथ खींचने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
4. सुरक्षा और प्रशासन के पुख्ता इंतजाम (Security & Arrangements)
इस विशाल धार्मिक महाकुंभ को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए ओडिशा सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। पूरे पुरी शहर में हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, साथ ही ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। चिकित्सा शिविर, पीने के पानी की व्यवस्था और यातायात नियंत्रण के लिए विशेष रूट तैयार किए गए हैं ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
