Ranchi : सामाजिक परिवर्तन शाला में प्रतिभागियों ने यूनिवर्स की उत्पत्ति से लेकर जीवों के क्रमिक विकास क्रम को जाना
रांची के नामकुम इलाके के बगइचा में आयोजित तीन दिवसीय “सामाजिक परिवर्तनशाला” के दूसरे दिन का कार्यक्रम शनिवार 20 जनवरी को शारीरिक व्यायाम के साथ प्रारंभ हुआ। इसके बाद दैनिक समाचार, खबरों का विश्लेषण आदि प्रतिभागियों के समूहों ने प्रस्तुत किया।

ज्ञापन पर कुमार दिलीप एवं साथियों चर्चा की। विषय पूर्वी सिंहभूम के जमशेदपुर के समीप डिमना डैम के विस्थापितों की ओर से सक्षम पदाधिकारी के नाम सौंपे जाने को लेकर था। इसमें सालों से मुआवजा लंबित रहने, नौकरियां नहीं मिलने, 1564 एकड़ ज़मीन का पूर्ण मुआवजा आदि की मांगें रखी गई।रोबिन ने गांव में बिजली कनेक्शन दिए जाने को लेकर तैयार ज्ञापन पढ़ सुनाया।

मनरेगा में घोटाले पर sonua के प्रखंड विकास पदाधिकारी के नाम ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।दिन भर में विभिन्न सत्रों के माध्यम से कई महत्त्वपूर्ण गतिविधियां चलेंगी ।बिजली के Transformer जल जाने के सम्बन्ध में ज्ञापन भी इसी क्रम में पढ़ सुनाया गया।एयरपोर्ट के समीप स्थित बस्ती में गर्मी में निर्बाध जलापूर्ति के सम्बंध में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।उसके बाद यूनिवर्स, वायुमंडल, पृथ्वी एवं अन्य ग्रहों तथा उपग्रहों (चंद्रमा) की उत्पत्ति को लेकर क्रमवार विडियो प्रोजेक्टर के ज़रिए जानकारी दी गई। Big Bang यानि सबसे बड़ा धमाका आज से लगभग 13.8 अरब साल पहले हुआ। उसके बाद यूनिवर्स में विभिन्न क्रियाएं और प्रतिक्रियाएं अरबों वर्षों तक होती रही।

4.5 अरब साल पहले पृथ्वी के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। हाइड्रोजन, कार्बनडाई ऑक्साइड, हीलियम आदि गैसें इस क्रम में बनी, लेकिन करोड़ों साल के बाद वायुमंडल में ऑक्सीजन बनना शुरू हुआ।धरती पर 2 से 1.8 अरब साल पहले जीव की उत्पत्ति हुई होगी यह वैज्ञानिकों ने पूरानी चट्टानों से पर लगाया।उल्का पिंड के आपस में टकराने से वायुमंडल में धूल पैदा हुई। फिर बादल बने। बादलों के संघनन के फलस्वरूप जल बना। फिर करोड़ों साल तक बारिश होती रही। धरती ठंड होनी शुरू हुई।सायनो बैक्टीरिया ने वायुमंडल में भारी मात्रा में ऑक्सीजन का निर्माण किया।थिया नामक एक पिण्ड के पृथ्वी से टकराने के कारण पृथ्वी पर जीवन संभव हुआ, क्योंकि तभी से जीव की उत्पत्ति के अनुकूल वातावरण बना। उसके बाद मछली की उत्पत्ति हुई।इसी पर प्रतिभागियों ने गहराई से अध्ययन किया गया। यह जानने का प्रयास किया गया कि आज जो जीव धरती पर रह रहे हैं, उनके अनुकूल वातावरण बनने में कितना लंबा समय लगा। विभिन्न सत्रों के ज़रिए इस विषय पर गहन अध्ययन और विवेचन किया गया।हर सत्र की शुरूआत क्रांतिकारी गीतों से हुई।इस कार्यशाला में विभिन्न ज़िलों के कुल 25 प्रतिभागी शामिल हुए।इस तीन दिवसीय सामाजिक परिवर्तन शाला में रिसोर्स पर्सन के तौर पर “SRUTI” संस्था के मोहन भाई, कमल कंठ, विकास कुमार, कुमार दिलीप, कामेश्वर आदि शामिल थे।
