जेठ माह की शुरुआत व कड़ाके की धुप और भीषण गर्मी के बीच उरांव समुदाय का ऐतिहासिक जतरा पूजा संपन्न
जेष्ठ की शुरुआत व कड़ाके धुप के भीषण गर्मी के बीच आज उरांव समुदाय का ऐतिहासिक जतरा पूजा में विधि पूर्वक पूजा अर्चना पाहन (पुजारी) श्री फागु खलखो सहयोगी पनभरवा (पुजारी) मंगरू टोप्पो के द्वारा की गई, एवं हमारे धर्मे बेला,ईष्ठ देवता, ग्राम देवता की पूजा कर अच्छी वर्षा की आह्वान की गई,जिससे अच्छी फसल व खेती बाड़ी किया जा सके l

चाईबासा के सातों अखाड़ा में क्षेत्रीय कमिटि के दिशा-निर्देश के अनुरूप नाच-गान धूम-धाम से किया गया l जतरा त्योहार उरांव समुदाय का ऐतिहासिक त्योहार है l इस त्योहार को विजय का प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जब रोहतास गढ़ जो उरांव समुदाय का सुसम्पन्न साम्राज्य था, उस समय के उरांवों के राजा उरूगन ठाकुर हुआ करते थे l राज्य की खुशहाली एवं सुसम्वन्नता को देखकर विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा राज्य को अपने अधीन कब्जा करने की नियति से तीन बार आक्रमण किया गया l परन्तु तीनों ही बार उन आक्रमणकारियों को पराजय का सामना करना पड़ा l इन तीनों युद्ध में दुश्मनों को पराजित करने में महिलाओं का हाँथ था, जिनमे दो महिला सिनगी दाई व कुईली दाई की अहम योगदान रही l सभी महिलाएं लड़कों के वेष में युद्ध की थी। महिलाओं के द्वारा तीन बार विजय प्राप्त करने के बाद विजय का प्रतीक मानकर जीत के उपलक्ष्य में जतरा त्योहार मनाया जाने लगा l

इस त्योहार में जिस ध्वज का उपयोग किया जाता है (जो नीले रंग की होती है) उस ध्वज के बीच में सफेद वृताकार के बीच तीन सफेद लकीर आज भी जीत के प्रतीक का चिन्ह मौजूद है l इस अवसर पर मुख्य रूप से समाज के मुखिया श्री लालू कुजूर एवं समाज के सभी पदाधिकारी,दुर्गा कुजूर,राजू तिग्गा,खुदिया कुजूर,सीताराम मुण्डा, शम्भु टोप्पो,राजेन्द्र कच्छप,जगरनाथ लकड़ा,कृष्णा तिग्गा,जगरनाथ टोप्पो,तेजो कच्छप,मथुरा कोया,शम्भु तिर्की, कृष्णा कच्छप, बिरसा लकड़ा, रवि तिर्की, बिरसा लकड़ा,बंधन खलखो,दीपक टोप्पो,सुनील खलखो,करमा कुजूर, पिन्टु कच्छप,उमेश मिंज,संजय तिग्गा ,नवीन कच्छप,राजेश कच्छप,बिगु लकड़ा,आकाश टोप्पो,सुखलाल कुजूर, चामा कुजूर,हुरिया बरहा, इन्द्रोदय कच्छप,लक्ष्मी कच्छप, पुतुल खलखो, लक्ष्मी खलखो, शांति कुजूर,शुभद्रा कच्छप,गीता कुजूर,सुमिया खलखो, शकुंतला मिंज आदि उपस्थित थे l
