ट्रंप ने ईरान की घेराबंदी को बताया ‘जीनियस’, बोले- परमाणु हथियार छोड़े बिना कोई समझौता संभव नहीं
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई सख्त नाकेबंदी (Blockade) की सराहना करते हुए इसे एक ‘जीनियस’ निर्णय बताया है। ट्रंप का कड़ा रुख यह स्पष्ट करता है कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी भी समझौते के लिए तभी तैयार होगा जब तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद कर देगा।
ट्रंप का बयान: हमारी नौसेना ने दिखाया दम
राष्ट्रपति ट्रंप ने विश्वास व्यक्त किया है कि ईरान की घेराबंदी पूरी तरह सफल रही है। उन्होंने अमेरिकी सैन्य शक्ति की प्रशंसा करते हुए कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता अब लगभग शून्य हो चुकी है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायु सेना अब मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने अन्य देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना के सामने टिक पाना किसी भी दुश्मन के लिए मुमकिन नहीं है।

ईरान की अर्थव्यवस्था हुई ध्वस्त
ईरान की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और नाकेबंदी के कारण ईरान की आर्थिक कमर टूट चुकी है। उनके अनुसार, अब ईरान के पास समझौते की मेज पर आने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि हालांकि वे सीधी बातचीत के पक्षधर हैं, लेकिन वर्तमान में संचार के अन्य माध्यमों से स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
42 जहाजों को रोका गया: सेंटकॉम की रिपोर्ट
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस सैन्य घेराबंदी का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल व्यापार पर पड़ा है। एडमिरल ब्रैड कूपर ने पुष्टि की है कि अमेरिकी नौसेना ने अब तक लगभग 42 वाणिज्यिक जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुँचने या वहां से निकलने से रोक दिया है। इस कार्रवाई ने ईरान के निर्यात और आयात को पूरी तरह ठप कर दिया है।
ईरान की शांति की पेशकश और ट्रंप की शर्त
मीडिया रिपोर्ट्स (द वॉल स्ट्रीट जर्नल) के मुताबिक, ईरान ने तनाव कम करने के लिए संघर्ष विराम का प्रस्ताव दिया है। ईरान के विदेश मंत्री ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी हटाता है, तो वे भी सामरिक क्षेत्रों में अपनी सैन्य गतिविधियों को रोक सकते हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ‘परमाणु सरेंडर’ ही किसी भी बातचीत की पहली और अनिवार्य शर्त होगी।
