यूपी में बाढ़ का रौद्र रूप! 35 जिले जलमग्न, 16,784 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, गंगा-यमुना के उफान से पूर्वांचल में बढ़ा संकट
उत्तर प्रदेश में कुदरत का कहर लगातार जारी है, जहाँ नदियों के उफनाने और मूसलाधार बारिश के चलते राज्य में बाढ़ की स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। गंगा, यमुना सहित राज्य की तमाम प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं, जिससे पूर्वांचल और उससे सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। बिगड़ते हालातों के बीच प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और अब तक कुल 16,784 प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित आश्रयों में स्थानांतरित किया जा चुका है। राहत और बचाव दल तटीय क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
35 जिलों तक पहुंचा बाढ़ का असर
प्रदेश के कुल 35 जिले इस वक्त कुदरत के प्रकोप से जूझ रहे हैं। नदियों के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी का पानी निचले इलाकों और रिहाइशी बस्तियों में फैल चुका है। गांवों के मुख्य रास्तों और घरों में जलभराव के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इसके अतिरिक्त बड़े पैमाने पर कृषि भूमि जलमग्न होने से फसलों के व्यापक नुकसान का खतरा पैदा हो गया है।
गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
विशेष रूप से पूर्वांचल के जिलों में गंगा नदी के रौद्र रूप ने स्थानीय प्रशासन और निवासियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं यमुना और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर भी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। खतरे की आशंका को देखते हुए नदी किनारे बसी बस्तियों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने और सुरक्षित शिविरों में जाने का निर्देश दिया गया है।
राहत शिविरों में पहुंचाए जा रहे लोग
आपदा प्रबंधन की टीमों द्वारा प्रभावित परिवारों को निकालकर शरण स्थलों में पहुंचाया जा रहा है। इन राहत शिविरों में भोजन, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा सहायता और दैनिक उपयोग की जरूरी सामग्रियां मुहैया कराई जा रही हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में नावें और मोटरबोट तैनात की गई हैं।
किसानों पर भी दोहरी मार
बाढ़ के पानी का फैलाव खेतों तक होने के कारण कृषक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है। खरीफ की फसलों और हरी सब्जियों की खेती जलमग्न हो जाने से किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। यदि पानी कुछ और दिनों तक खेतों में जमा रहा, तो फसलें पूरी तरह से सड़ सकती हैं। आगामी दिन प्रदेश के लिए काफी चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं और जिला प्रशासन नदियों के प्रवाह पर पल-पल की नजर रखे हुए है।


