तेल-गैस सस्ता, रुपया होगा मजबूत; US-ईरान डील भारत के लिए क्यों अहम?
पश्चिम एशिया में पिछले करीब 100 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद आखिरकार वैश्विक शांति की दिशा में एक बड़ी उम्मीद जगी है। अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है। आगामी शुक्रवार को जिनेवा में इस शांति सौदे के लागू होने पर औपचारिक मुहर लग जाएगी। यह घटनाक्रम भारत के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस शांति समझौते की घोषणा के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) के रास्ते वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन भी बिना किसी बाधा के दोबारा शुरू हो गया है, जो भारत के लिए एक बड़ी राहत है।
गौरतलब है कि पिछले करीब 4 महीनों से चल रहे इस तनाव ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर डाला था। होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता प्रभावित होने के कारण भारत के लिए तेल और गैस की आपूर्ति का संकट खड़ा हो गया था। अब इस शांति समझौते के अमलीजामा पहनने से भारत को कई मोर्चों पर सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। पहला बड़ा फायदा कच्चे तेल और गैस की कीमतों में कमी के रूप में दिखेगा। युद्ध के चलते कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे थे, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस महंगी होने की आशंका गहरा गई थी। लेकिन इस डील की खबर आते ही बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम करीब 4.5 प्रतिशत गिरकर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं।
रुपया होगा मजबूत
इस समझौते का दूसरा बड़ा फायदा भारतीय मुद्रा को मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने और भू-राजनीतिक तनाव कम होने के चलते अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया एक ही दिन में 40 पैसे मजबूत हो गया। इसके अतिरिक्त, इस शांति सौदे से देश में महंगाई की रफ्तार पर भी लगाम लगेगी। ईंधन और गैस की कीमतें घटने से माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स कॉस्ट) पर आने वाला खर्च कम होगा, जिससे घरेलू बाजार में खाने-पीने की चीजों समेत अन्य जरूरी सामानों के दाम नियंत्रण में रहेंगे और खुदरा महंगाई दर में गिरावट आएगी।
खुल गई दुनिया की लाइफलाइन
इस ऐतिहासिक शांति समझौते का जमीनी असर भी तत्काल देखने को मिलने लगा है। भारत का एलएनजी (LNG) टैंकर जहाज ‘दिशा’ सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुका है। ‘दिशा’ पिछले तीन महीनों से इस युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसा हुआ था। संघर्षविराम के एलान के बाद यह जहाज कतर के रास लफ्फान से 62,370 मीट्रिक टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) लेकर सुरक्षित तरीके से अरब सागर में दाखिल हो गया है। उम्मीद है कि यह 18 जून तक गुजरात के दहेज पोर्ट पर पहुँच जाएगा। युद्ध की शुरुआत के बाद से बिना अपना सैटेलाइट सिग्नल बंद किए इस संवेदनशील समुद्री रास्ते को पार करने वाला यह पहला भारतीय कमर्शियल जहाज बन गया है।
ईरान से दोबारा तेल खरीदेगा भारत?
इस वैश्विक समझौते के बाद अब रणनीतिक गलियारों में यह सवाल भी तेजी से उठ रहा है कि क्या भारत एक बार फिर ईरान से कच्चे तेल का आयात शुरू करेगा। याद दिला दें कि साल 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान ईरान पर लगाए गए कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत को वहाँ से तेल खरीदना बंद करना पड़ा था। उस समय ईरान भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति करने वाले शीर्ष तीन देशों में शुमार था। अब यदि अमेरिका इन प्रतिबंधों को हटा लेता है, तो भारत को फिर से रियायती दरों पर सस्ता तेल मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका ने फिलहाल ईरान पर लगे प्रतिबंधों को तुरंत हटाने से मना किया है।


