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September 15, 2026

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राष्ट्रपति के ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ पर बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र को भेजी सीक्रेट रिपोर्ट, दी सफाई

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे के दौरान हुए कथित ‘प्रोटोकॉल उल्लंघन’ (Protocol Violation) मामले में राज्य सरकार ने सीक्रेट रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी है. सोमवार को राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है. इस रिपोर्ट में उन परिस्थितियों और प्रशासनिक निर्णयों का ब्योरा दिया गया है, जिसकी वजह से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शीर्ष अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे.

क्या है पूरा मामला?

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 7 मार्च को पश्चिम बंगाल सरकार से इस संबंध में जवाब मांगा था. आरोप है कि राष्ट्रपति के बंगाल आगमन के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुपस्थित थे. इसे ‘ब्लू बुक’ (Blue Book) के नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया है, जिसमें राष्ट्रपति की सुरक्षा और सम्मान के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय होते हैं.

रिपोर्ट में राज्य सरकार की दलीलें

मुख्य सचिव ने केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को जो सीक्रेट रिपोर्ट भेजी है, उसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट किया गया है.

  • सीएम की अनुपस्थिति : रिपोर्ट में उन कारणों का उल्लेख किया गया है, जिनकी वजह से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आधिकारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बन सकीं.
  • कार्यक्रम स्थल का बदलाव : राष्ट्रपति के दौरे के दौरान ‘अंतरराष्ट्रीय आदिवासी और संथाल सम्मेलन’ का स्थान अचानक क्यों बदला गया, इसके पीछे के प्रशासनिक और सुरक्षा कारणों के दस्तावेज भी केंद्र को सौंपे गये हैं.
  • प्रशासनिक रिकॉर्ड : राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हर चरण पर लिये गये फैसलों को रिकॉर्ड में रखा गया है और सहायक दस्तावेज भी रिपोर्ट के साथ संलग्न हैं.

‘ब्लू बुक’ और संवैधानिक गरिमा

इतिहास के पन्ने से : प्रोटोकॉल पर कोलकाता-दिल्ली की भिड़ंत

नियमों के अनुसार, जब राष्ट्रपति किसी राज्य के दौरे पर जाती हैं, तो मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष अधिकारियों का वहां मौजूद होना प्रोटोकॉल का हिस्सा है. सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्रालय ने इसे ‘गंभीर चूक’ के तौर पर लिया है. हालांकि, राज्य सरकार का दावा है कि उनके निर्णय प्रशासनिक बाध्यताओं पर आधारित थे.

बंगाल की राजनीति में यह पहली बार नहीं है, जब प्रोटोकॉल के मुद्दे पर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच विवाद खड़ा हुआ है. इससे पहले भी कई बार प्रोटोकॉल को लेकर विवाद हो चुका है, जो इस प्रकार हैं –

  • कलाईकुंडा विवाद (मई 2021) : चक्रवात ‘यास’ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी देरी से पहुंची थीं और रिपोर्ट सौंपकर चली गयीं थीं. इसे केंद्र ने बड़ा प्रोटोकॉल उल्लंघन माना था.
  • मुख्य सचिव विवाद : कलाईकुंडा विवाद के बाद तत्कालीन मुख्य सचिव आलापन बंद्योपाध्याय को दिल्ली तलब किया गया था, जिस पर राज्य और केंद्र के बीच हफ्तों तक संवैधानिक गतिरोध चला था.
  • राजभवन बनाम नबान्न : पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के कार्यकाल के दौरान भी विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल को लेकर दर्जनों बार पत्राचार हुआ था.

ब्लू बुक क्या है?

यह एक अति-गोपनीय दस्तावेज है, जिसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति की सुरक्षा और प्रोटोकॉल के सख्त नियम होते हैं.

किन लोगों की उपस्थिति होती है अनिवार्य?

नियम है कि जब राष्ट्रपति किसी राज्य में कदम रखते हैं, तो मुख्यमंत्री (CM), मुख्य सचिव (CS) और पुलिस महानिदेशक (DGP) का स्वागत के लिए वहां मौजूद होना अनिवार्य है.

सीटिंग अरेंजमेंट कैसे तय होता है?

आधिकारिक कार्यक्रमों में मंच पर बैठने का क्रम और सुरक्षा घेरे की जिम्मेदारी पूरी तरह इसी बुक के आधार पर तय होती है.

राष्ट्रपति से जुड़े विवाद के केंद्र में क्या है?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सिलीगुड़ी दौरे पर सीएम ममता बनर्जी और शीर्ष अधिकारियों की अनुपस्थिति को केंद्र ने इसी ‘ब्लू बुक’ का उल्लंघन माना है.

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