दलमा वन्य प्राणी आश्रयनी में आदिवासियों-मूलवासियों का शिकार पर्व सेंदरा संपन्न
सरायकेला जिला के दलमा वन्य प्राणी आश्रयनी में आदिवासियों-मूलवासियों का शिकार पर्व सेंदरा इस वर्ष ना के बराबर हुआ । इस वर्ष वन विभाग ने सेंदरा पर वन्य प्राणियों का संहार रोकने के लिए एड़ी चोटी एक करदी और वन्य प्राणी को राहत मिली है। दलमा सेंदरा में लगभग 100 से भी कम लोग शिकार करने दलमा पहुंचे। पुरे दलमा में वन्य प्राणी आश्रयणी के प्रभारी और वन कर्मचारी भी वन्य प्राणियों की हत्या नहीं होने देने के लिए पूरा जोर लगाए हुए थे।

डीएफओ डॉ अभिषेक कुमार खुद दिन भर दलमा के जंगल में गस्ती कर छानबीन करते रहे। इसदौरान वन विभाग के आरएफओ दिनेश चंद्रा अपने दल के साथ पट्रोलिंग करने के दौरान दलमा के चिपिंगडारी 10 से अधिक शिकारी पारंपरिक हथियारों से लैस होकर जंगल में घूम रहा था जिसकी सूचना पर आरएफओ दिनेश चंद्रा, पूर्बी आरएफओ अपर्णा चंद्रा, फारेस्टर सागर श्रीवास्तव एवं हरी प्रशाद अग्रवाल पूरी टीम के साथ वहां पहुंचे और शिकारियों को समझाया।इस दौरान शिकारियों ने कहा कि अखबार में खबर छपने के कारण ही वे परंपरा निभाने दलमा पहुंचे हैं। वन अधिकारी ने सभी का 5 फांस, एक बंदूक आदि जब्त किया है। शिकार पर्व मनाने की घोषणा को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह सतर्क था। दलमा में 10 जल स्रोतों के पास शिकार के संभावित स्थानों पर वन विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों को विशेष रूप से लगाया गया था। इन सभी ने दिन-रात ड्यूटी देकर शिकार रोकने में अहम योगदान दिया। शिकार रोकने के लिए रविवार से ही पेट्रोलिंग शुरू हो गई थी।

दलमा रेंजर दिनेश चंद्रा ने बताया कि सभी नाकों पर वन विभाग के कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। एक भी वन्य प्राणी का शिकार नहीं हुआ है। उन्होंने शिकार रोकने में सहयोग देने के लिए स्थानीय लोगों, वन विकास समिति और वन विभाग के कर्मचारियों को बधाई दी।दलमा बुरू सेंदरा समिति के अध्यक्ष सह दलमा राजा राकेश हेम्ब्रम की और से सेंदरा पर्व को लेकर जंगली जानवरों का शिकार नहीं करने एवं पूजा-पाठ, खेलकूद, नाच-गान के साथ सेंदरा पर्व को पारंपरिक तरीके से मनाने की अपील किया है । जिसको लेकर दलमा के कई चौक चौहरा पर बैनर लगया गया था ।
