55 साल बाद बंगाल की खाड़ी में आएगी पाकिस्तान की सबमरीन! पीएनएस हैंगोर की तैनाती से बढ़ेगी भारत की चिंता?
PNS Hangor Bay of Bengal: साल 1971 के ऐतिहासिक युद्ध के बाद अस्तित्व में आया बांग्लादेश कभी पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा हुआ करता था। उस वक्त पश्चिमी पाकिस्तान के दमनकारी रवैये और अत्याचारों के विरोध में बांग्लादेश ने एक लंबी लड़ाई लड़कर खुद को स्वतंत्र कराया था। करीब पांच दशकों से भी अधिक समय तक दोनों मुल्कों के कूटनीतिक रिश्तों में भारी कड़वाहट और दूरी बनी रही। हालांकि, वर्ष 2024 में शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के तख्तापलट के बाद से ढाका और इस्लामाबाद के बीच दूरियां तेजी से घट रही हैं और आपसी सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। अब इस बढ़ती नजदीकी के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जो भारतीय सुरक्षा रणनीतिकारों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच सकता है।
हाल ही में चीन में तैयार की गई पाकिस्तान की अत्याधुनिक हैंगोर क्लास की पहली पनडुब्बी औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल होकर कराची बंदरगाह पहुंच चुकी है। इस पनडुब्बी के आगमन के बाद पाकिस्तानी नौसेना के उच्च पदस्थ सूत्रों से जो जानकारियां छनकर आ रही हैं, वे काफी चौंकाने वाली हैं। संकेतों की मानें तो इस्लामाबाद इस घातक सबमरीन को केवल अरब सागर की सीमाओं तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। पाकिस्तान की असल रणनीति इसके जरिए बंगाल की खाड़ी के पानी में अपनी नौसैनिक धमक को दोबारा जिंदा करने की है।
श्रीलंका में पाकिस्तानी अधिकारी ने क्या कहा?
इस नई पनडुब्बी को सुरक्षा देने वाले जहाजी बेड़े की कमान संभाल रहे कमोडोर उमर फारूक ने हाल ही में श्रीलंका दौरे के दौरान एक बड़ा बयान दिया है। कोलंबो के प्रतिष्ठित मीडिया पोर्टल ‘द मॉर्निंग’ के हवाले से सामने आई खबर के मुताबिक, कमोडोर फारूक ने कहा कि नई हैंगोर श्रेणी की सबमरीन्स के नौसेना में शामिल होने के बाद अब पाकिस्तानी नौसेना के लिए बंगाल की खाड़ी जैसे सुदूर समुद्री क्षेत्रों में भी अपनी निरंतर मौजूदगी दर्ज कराना बेहद आसान हो जाएगा।
कोलंबो पोर्ट पर खड़े पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस तैमूर पर आयोजित एक ऑफिशियल प्रोग्राम के दौरान उन्होंने इस पनडुब्बी को समुद्री संतुलन बदलने वाला यानी ‘गेम चेंजर’ करार दिया। अधिकारी ने यह भी साझा किया कि पाकिस्तान आने वाले दिनों में ऐसी कुल आठ एडवांस पनडुब्बियों को अपनी फ्लीट का हिस्सा बनाने की वृहद योजना पर गंभीरता से काम कर रहा है।
पाकिस्तान की नजर अब केवल तटीय सुरक्षा तक सीमित नहीं?
इस आधुनिक चीनी पनडुब्बी की डिलीवरी से पहले तक पाकिस्तानी नौसेना के पास कुल पांच सबमरीन्स का बैकअप था। चीन के सहयोग से तैयार हो रहीं ये नई पनडुब्बियां पुरानी हो चुकीं ‘अगोस्ता क्लास’ की पनडुब्बियों की जगह लेंगी। रक्षा विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तानी कमांडर का यह बयान साफ तौर पर इस बात की तस्दीक करता है कि इस्लामाबाद अब सिर्फ अपनी समुद्री सीमाओं की रखवाली करने वाले पारंपरिक नजरिए से आगे निकल चुका है।
पाकिस्तान अब पूरे हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी ऑपरेशनल कैपेसिटी और रणनीतिक पैठ को कई गुना बढ़ाने की फिराक में है। अगर पाकिस्तान की यह मंशा हकीकत का रूप लेती है, तो गहरे समंदर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों तथा पनडुब्बियों का आमना-सामना होने की घटनाएं पहले के मुकाबले काफी बढ़ सकती हैं।
बंगाल की खाड़ी में मौजूदगी बढ़ाने की बात क्यों महत्वपूर्ण?
एक सीनियर पाकिस्तानी नेवी ऑफिसर के दावे के मुताबिक, यह नई सबमरीन इस्लामाबाद को इतनी ताकत और रेंज प्रदान करती है कि वह अपने बेस से बहुत दूर यानी बंगाल की खाड़ी जैसे रणनीतिक मोर्चे पर भी लंबे समय तक डटी रह सकती है। साल 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद से इस पूरे समुद्री इलाके में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां और हलचल न के बराबर यानी शून्य रही हैं।
वास्तव में, 1971 की करारी शिकस्त के बाद से पाकिस्तान ने इस इलाके से पूरी तरह दूरी बना ली थी, लेकिन अब बदले भू-राजनीतिक परिवेश में वह चीन के सहारे दोबारा भारत के इस पूर्वी समुद्री द्वार पर दस्तक देने की कोशिश कर रहा है।


