Categories

September 15, 2026

INDIA FIRST NEWS

Satya ke saath !! sadev !!

FSSAI का एक्शन: ‘100% शुद्ध’ दावे वाले डाबर के शहद और घी की बिक्री पर रोक

देश की दिग्गज एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों में शुमार डाबर इंडिया के कई लोकप्रिय उत्पाद अब भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के शिकंजे में आ गए हैं। इनमें घी, शहद और तेल जैसे कई रोज़मर्रा के सामान शामिल हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इन सामानों की बिक्री के दौरान पैकेट और लेबल पर किए गए बड़े-बड़े दावों को लेकर खाद्य नियामक ने सख्त एतराज जताया है।

FSSAI ने डाबर इंडिया को ऐसे किसी भी खाद्य उत्पाद को बेचने से तत्काल रोक दिया है, जिन पर ‘100%’ या ‘100% शुद्ध’ जैसी बातें लिखी गई हैं। संस्था का मानना है कि ऐसे विज्ञापनों और दावों का कोई ठोस वैज्ञानिक या लैब-प्रमाणित आधार नहीं पेश किया जा सकता, जिससे आम उपभोक्ताओं के गुमराह होने का गंभीर खतरा बना रहता है।

खाद्य सुरक्षा नियामक की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, यह कार्रवाई डाबर के शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल के तेल, देसी गाय के घी, नारियल पानी तथा कोकोनट मिल्क जैसे प्रोडक्ट्स पर की गई है। कंपनी अपनी वेबसाइट और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर इन्हें ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% purity guaranteed’, ‘100% ऑर्गैनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ बताकर बेच रही थी। FSSAI का स्पष्ट रुख है कि इस तरह के बेबुनियाद दावे ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018’ के नियमों का उल्लंघन करते हैं।

FSSAI ने क्या कहा आपत्ति को लेकर

नियामक संस्था ने जांच के दौरान कई बड़ी खामियां पाई हैं:

  • बिना मंजूरी ‘जैविक भारत’ का लोगो: डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर बिना वैध FSSAI ऑर्गेनिक क्लीयरेंस के ‘Jaivik Bharat’ के चिन्ह का उपयोग किया जा रहा था।
  • मिश्रित खाद्य पदार्थों पर भ्रामक दावे: डाबर ‘Homemade Coconut Milk’ पर 100% शुद्धता का दावा कर रहा था। नियामक का कहना है कि 2018 के विज्ञापन नियमों के अनुसार मिश्रित या कंपाउंड फूड (Compound Foods) के श्रेणी वाले उत्पादों पर ‘100% प्योर’ जैसे दावे करना नियम विरुद्ध है।

डाबर को नोटिस पहले किया गया था जारी

FSSAI ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इससे पहले भी डाबर को एक औपचारिक नोटिस भेजा गया था, जिसमें इन भ्रामक ‘100%’ दावों को हटाने और विज्ञापन सुधारने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि, नियामक के अनुसार कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया और भ्रामक लेबलिंग जारी रही। इसी लापरवाही के चलते FSSAI को इन उत्पादों की बिक्री और प्रचार पर कड़ा प्रतिबंध लगाने का फैसला लेना पड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *