उत्कल एसोसिएशन साकची जमशेदपुर के तत्वावधान में आज ओड़िआ नववर्ष तथा पणा संक्रांति के मौके पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया
उत्कल एसोसिएशन साकची जमशेदपुर के तत्वावधान में आज ओड़िआ नववर्ष तथा पणा संक्रांति के मौके पर एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कवि सम्मेलन के मुख्य प्रोफेसर मनोज महापात्र अतिथि थे।

इस कार्यक्रम के अध्यक्षता असोसिएशन के अध्यक्ष डाक्टर श्रीधर प्रधान एवं उपाध्यक्ष डॉ संजय पात्रा ने किया। कविता संकलन श्री बादल भूंया ने किया , मंच संचालन श्री प्रदीप कुमार दास ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ अशोक महापात्रा ने की। मुख्य अतिथि ने नववर्ष पर शुभकामनाएं दी तथा बताया कि आज से ही ओडिआओं का नया पंचांग शूरु होता है तथा फल, दही, सत्तु, बेल व अन्य वस्तुओं से बना शर्वत पीने का विधान है जिसे पणा बोला जाता है। सभी के घरों में तुलसी पेड़ के ऊपर छेद किया हुआ एक कलश स्थापना की जाती है जिसे वसुंधरा ठेकी कहा जाता है जिससे तुलसी पेड़ के ऊपर टप टप पानी टपकती है ।
इस शुभ अवसर पर उत्कल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष श्री बादल भूंया के द्वारा प्रकाशित सिंहभूम पत्रिका का विमोचन संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों ने किया। श्री बादल भूंया ने बताया कि यह पत्रिका जमशेदपुर के लेखक और कवियों को प्राथमिकता देती है तथा उन लोगों की लेख इस पत्रिका में प्रकाशित होता है।
कवि सम्मेलन में कवि काशीनाथ गौड़, अशोक महापात्रा, बादल भुंया, सस्मिता पात्रा, रंजन भुंया, मणीचरण साहू, आदित्य कवि, सुकांत दाश, मनोरंजन स्वांई, मनोरंजन गौड़, रंजन पण्डा, रेणुवाला मिश्र किशोर कुमार नायक, पवित्र मोहन जेना, सोमेन्द्र भुंया, गीता गौड़ आदि कवियों ने अपनी अपनी कविता पाठ किया। इस मौके पर उत्कल एसोसिएशन के ट्रस्टी डाक्टर सीमांचल राउल, सदस्य प्रिय रंजन दाश, सुरजीत साहु, सरोज गौड़, जतीन्द्रनाथ मिश्र, विजय मिश्र, सौदामिनी मिश्र एवं उनके परिवार उपस्थित थे। अंत में पणा का सेवन किया गया।
