नारायण प्राइवेट आईटीआई संस्थान में हुल दिवस मनाया गया, शहीदों को किया नमन
सरायकेला (झारखंड), 30 जून 2023 : नारायण प्राइवेट आईटीआई संस्थान लुपुंगडीह में सिदो-कान्हू के तस्वीर पर सभी कर्मचारियों के द्वारा तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर हुल दिवस मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक डाक्टर जटा शंकर पांडे ने कहा कि सिदो-कान्हू मुर्मू का जन्म भोगनाडीह नामक गाँव में एक संथाल आदिवासी परवार में हुआ था जो कि वर्तमान में झारखण्ड के साहेबगंज जिला के बरहेट प्रखंड में है। इन दो भाइयों के नेतृत्व में संथाल विद्रोह हुआ था जिसे हुल विद्रोह भी कहा जाता है। संथाल विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाने वाले इनके और दो भाई भी थे जिनका नाम चाँद मुर्मू और भैरव मुर्मू था। इनके अलावा इनके दो बहने भी थी जिनका नाम फुलो मुर्मू एवं झानो मुर्मू था। सिदो-कान्हू कि जीवनी एवं हूल आन्दोलन संथाल परगना को पहले जंगल तराई के नाम से जाना जाता था। संथाल परगना को अंग्रेजो द्वारा दामिन ए कोह कहा जाता था और इसकी घोषणा 1824 को हुई।
सिदो-कान्हू ने 1855-56 मे ब्रिटिश सत्ता, साहुकारो, व्यपारियों व जमींदारो के अत्याचारों के खिलाफ एक विद्रोह कि शुरूवात कि जिसे संथाल विद्रोह या हूल आंदोलन के नाम से जाना जाता है। संथाल विद्रोह का नारा था करो या मरो अंग्रेजो हमारी माटी छोड़ो। सिदो ने अपनी दैवीय शक्ति का हवाला देते हुए सभी मांझीयों को साल की टहनी भेजकर संथाल हुल में शामिल होने के लिए आमंत्रन भेजा। 30 जून 1855 को भेगनाडीह में संथाल आदिवासी की एक सभा हुई जिसमें 400 गांवों के 50,000 संथाल एकत्र हुए। जिसमें सिदो को राजा, कान्हू को मंत्री, चाँद को मंत्री एवं भैरव को सेनापति चुना गया। संथाल विद्रोह भोगनाडीह से शुरू हुआ जिसमें संथाल तीर-धनुष से लेकर अपने दुश्मनो पर टुट पड़े। इस अवसर पर संस्थान में मुख्य रूप से उपस्थित थे अधिवक्ता निखिल कुमार , बिमल ओझा, हरी नारायण साहू, शांति राम महतो, पवन कुमार महतो, अजय मण्डल, शंकर दास, देव कृष्णा महतो, कृष्णा महतो, गौरव महतो, आदि मौजूद थे।
