होली पर्व के नजदीक आते ही पलाश के पेड़ों पर फूलों की छाई बहार
बसंत ॠतु के बीतने व होली पर्व के नजदीक आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में पलाश के फूल चारों ओर दिखाई देने लगे हैं। पेड़ों पर पलाश के फूलों को बहार छाई हुई है, जिससे वातावरण का सौंदर्य बढ़ने लगा है। सड़कों के किनारे लगे पलाश के पेड़ों पर आए फूलों ने सड़कों की रौनक बढ़ा दी है।

पलाश के फुल पत्ते व लकड़ी स्वास्थ्य के लिए भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं, जिससे कोई रोगों की दवाई बनाई जाती है। पलाश के फूलों से होली का पर्व पर रंग भी बनाया जाता है। बसंत ऋतु के समय यह फूल खिलने लगते हैं। होली के आसपास या फूल चरम पर आकर जंगल की खूबसूरत तो में चार चांद लगा देते हैं। हालांकि रंग उत्सव में अभी ज्यादा दिन नहीं बचे हैं लेकिन प्रकृति ने इसकी तैयारी बसंत ॠतु के आगमन के साथ ही कर ली है।

ग्रामीण क्षेत्र में पलाश की फूलों लोगों को अपने और आकर्षित करने लगे हैं आज भले ही हमें केमिकल युक्त रंग, गुलाल से होली पर्व मनाते हैं लेकिन एक समय था जब हमारे पूर्वज पलाश की फूलों से ही होली खेला करते थे। पलाश के फूल से ही होली खेला करते थे। पलाश के फूल को होली के लिए एक दिन पहले एकत्रित कर उस मिट्टी के पात्र में रखकर गर्म करते थे इससे प्राकृतिक रंग तैयार होता था।
