सीएम सम्राट आज पेश करेंगे विश्वास मत, जानिए कितने विधायकों के समर्थन की है जरूरत
बिहार के राजनीतिक गलियारे में आज हलचल तेज है। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान अपनी सरकार का विश्वास मत (Confidence Motion) पेश करेंगे। सदन की मौजूदा स्थिति और एनडीए के पास मौजूद विधायकों की संख्या को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि सरकार अपनी शक्ति साबित करने में सफल रहेगी।
बहुमत के लिए जादुई आंकड़े की जरूरत
बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को विश्वास मत हासिल करने के लिए 122 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। वर्तमान में सदन के भीतर एनडीए गठबंधन के पास कुल 201 विधायकों का भारी समर्थन मौजूद है। इस मजबूत संख्या बल के कारण राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विश्वास मत की प्रक्रिया बेहद सहज होगी और इसे ध्वनि मत से भी पारित किया जा सकता है।
उपमुख्यमंत्री का भरोसा
सदन की कार्यवाही से पहले उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने विश्वास जताया कि सरकार को अपनी शक्ति प्रदर्शन में किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए के सभी सहयोगी दल—बीजेपी, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम (HAM) और रालोमो—पूरी तरह एकजुट हैं और सभी विधायक सदन में उपस्थित रहेंगे।
छह माह के भीतर दूसरा फ्लोर टेस्ट
बिहार के संसदीय इतिहास में यह एक दुर्लभ संयोग है कि मात्र 6 महीने के अंतराल में सरकार को दूसरी बार विश्वास मत का सामना करना पड़ रहा है। इससे पहले दिसंबर 2025 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने बहुमत सिद्ध किया था। अब सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बनी नई एनडीए सरकार आज सदन में अपनी ताकत दिखाएगी। सचिवालय के आदेशानुसार, यह विशेष सत्र एक दिन के लिए आयोजित किया गया है।
15 अप्रैल को हुई थी ताजपोशी
उल्लेखनीय है कि सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। उनके साथ जदयू कोटे से बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पदभार ग्रहण करने के बाद से ही सम्राट चौधरी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर जनता की समस्याओं के समाधान के लिए ‘जनता दरबार’ की भी शुरुआत की है।
वित्त विभाग की अहम समीक्षा बैठक
विश्वास मत पेश करने से ठीक एक दिन पहले, गुरुवार को मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग और आंतरिक संसाधनों की गहन समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश में राजस्व बढ़ाने की नई संभावनाओं पर काम किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी धन का सदुपयोग और वित्तीय अनुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विकास लक्ष्यों को समय सीमा के भीतर पूरा करने पर विशेष जोर दिया ताकि राज्य की प्रगति की रफ्तार बनी रहे।

