सच्चे मन से किये गए श्रवण, कीर्तन और स्मरण से तो भगवान भी अपने आप को भक्त से मिलने से नहीं रोक सकते – आचार्य वेदानंद शास्त्री
सरायकेला मारवाड़ी युवा मंच अखिल भारत मारवाड़ी महिला समिति अखिल भारतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त तत्वाधान में मारवाड़ी धर्मशाला में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आठवें दिन आचार्य वेदानंद शास्त्री ने बताया कि सच्चे मन से किये गए श्रवण, कीर्तन और स्मरण से तो भगवान भी अपने आप को भक्त से मिलने से नहीं रोक सकते।

राम कथा के दौरान भगवान राम और शबरी माता के मिलन के संदर्भ उन्होनें कहा कि माता शबरी की भक्ति ने भगवान श्रीराम को उनसे मिलने पर विवश कर दिया। भगवान राम जब वनवास में थे उनकी मुलाकात माता शबरी से हुई।

मतंग मुनि का महाप्रयाण हुआ तो उन्होंने शबरी से कहा कि वे अपने आश्रम में ही भगवान राम की प्रतीक्षा करें, वे उनसे मिलने जरूर आएंगे। सीता हरण पश्चात भगवान श्री राम जब पहुंचे तो शबरी ने आदर कर कंद-मूल तो उन्होंने राम जी को दिए, लेकिन बेर खट्टे ना हो इस डर से उन्हें देने का साहस नहीं कर पाईं। अपने भगवान को मीठे बेर खिलाने के लिए उन्होंने उन्हें चखना शुरू किया। अच्छे और मीठे बेरों को राम जी को देने लगी और खट्टे बेरों को फेंकने लगी। भगवान राम शबरी की इस भक्ति को देख मोहित हो गए। श्रीराम ने शबरी की भक्ति से प्रभावित होकर शबरी के जूठे बेर खाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया। शबरी की भक्ति ही थी कि भीलनी जाति की होने के बावजूद श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर खाए और उसे नवधा भक्ति का उपदेश दिया। भगवान राम ने जाने से पहले शबरी देवी को वैकुंठ में निवास करने का आशीर्वाद दिया। भगवान और भक्त के बीच केवल प्रेम का रिश्ता होता है।

मन में अगर भगवान के प्रति सच्चा प्रेम हो, तो आपको उन्हें खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वह स्वयं ही आप तक पहुँच जाएंगे और उन्हें सच्चे मन से अर्पित की कई हर एक वस्तु वह प्रेमपूर्वक स्वीकार करेंगे। आठवें दिन कथा के मुख्य यजमान सीताराम सेक्सरिया मनोज कुमार चौधरी, युवा मंच के अध्यक्ष आकाश अग्रवाल महिला समिति की अध्यक्षा रेखा सेक्सरिया रविंद्र अग्रवाल बबीता अग्रवाल सविता चौधरी इंद्रा अग्रवाल सरोज सेक्सरिया सुषमा चौधरी कविता अग्रवाल एवं काफी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे।
