डिजिटल इंडिया के 10 साल: अब असली परीक्षा भरोसे और समावेशन की
‘पहले दस साल तकनीक के थे, अगले दस साल भरोसे के होंगे’
एक दशक पहले जब ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान की शुरुआत हुई थी, तब इसका प्राथमिक उद्देश्य पूरे देश को तकनीकी नेटवर्क से जोड़ना था। आज यूपीआई भुगतान से लेकर डिजिटल लॉकर और सरकारी सेवाओं तक भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। डिजिटल इंडिया के 10 वर्ष पूरे होने पर सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या हर नागरिक इस डिजिटल नेटवर्क पर समान रूप से भरोसा करता है? स्टैंडर्ड चार्टर्ड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग, किशलय कुंतल के अनुसार, भारत ने पिछले दस सालों में डिजिटल परिवर्तन का एक बेहतरीन वैश्विक मॉडल प्रस्तुत किया है।
आज रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े किराना स्टोर तक क्यूआर (QR) कोड के जरिए लेन-देन कर रहे हैं। डिजिटल पेमेंट्स अब सिर्फ एक विकल्प न रहकर दिनचर्या का अंग बन चुका है। भारत का ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) आज वैश्विक स्तर पर केस स्टडी बन गया है।
तकनीक का लोकतांत्रीकरण
किशलय कुंतल का मानना है कि डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने आधुनिक तकनीक का समावेशन किया। अतीत में डिजिटल सुविधाएं सीमित वर्ग तक सीमित थीं, लेकिन अब छोटे व्यापारी भी देशभर के बाजारों से जुड़ पा रहे हैं। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से सरकारी योजनाओं की राशि बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। डिजिटल वेरिफिकेशन प्रक्रिया सुगम हुई है और नकदी पर निर्भरता में भारी कमी आई है।
डिजिटल पहुंच और डिजिटल भरोसा: दो अलग पहलू
डिजिटल तंत्र के प्रसार के साथ-साथ नई चुनौतियां भी तेजी से उभरी हैं। यद्यपि इंटरनेट की पहुंच करोड़ों लोगों तक हो चुकी है, परंतु क्या सभी नागरिक इसका सुरक्षित उपयोग करने में सक्षम हैं?
ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी लिंक, ओटीपी स्कैम और साइबर क्राइम में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। किशलय के अनुसार, नागरिकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना पहला चरण था, परंतु उन्हें ऑनलाइन सुरक्षित महसूस कराना दूसरा और अधिक जटिल चरण है। डिजिटल पहुंच और डिजिटल सुरक्षा/विश्वास दो भिन्न विषय हैं।
MSME और डिजिटल डेटा का सही उपयोग
डिजिटल पेमेंट अपनाना एक शुरुआती चरण था, परंतु वास्तविक आर्थिक प्रगति अभी शेष है। देश के करोड़ों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME) रोजाना डिजिटल वित्तीय लेन-देन कर रहे हैं, लेकिन उनके इस डेटा का पूर्ण लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। यदि इस डिजिटल डेटा का सही आकलन किया जाए, तो छोटे उद्यमियों को बिना किसी जटिल प्रक्रिया के आसानी से क्रेडिट (ऋण) उपलब्ध कराया जा सकता है, जिससे वे अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगे।
एकीकृत डिजिटल शासन (Unified Digital Governance)
वर्तमान में अनेक सरकारी सेवाएं डिजिटल माध्यम पर उपलब्ध हैं, परंतु आम जनता के लिए हर सेवा हेतु अलग पोर्टल या ऐप का उपयोग करना जटिल होता है। भविष्य का डिजिटल मॉडल ऐसा होना चाहिए जहां नागरिक को अलग-अलग ऐप्स के बीच भटकना न पड़े और उसे एक एकीकृत (Integrated) एवं सहज अनुभव प्राप्त हो।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का जिम्मेदार उपयोग
यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग नैतिक और जवाबदेह तरीके से नहीं किया गया, तो डेटा प्राइवेसी, सिक्योरिटी और भ्रामक जानकारियों (Disinformation) जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसीलिए तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और निष्पक्षता जरूरी है।
साइबर सुरक्षा होगी सबसे बड़ी प्राथमिकता
जैसे-जैसे डिजिटल अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ेगा, साइबर हमलों का जोखिम भी उतना ही गहरा होगा। बैंकिंग प्रणाली, व्यक्तिगत डेटा, और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर अब पूरी तरह डिजिटल नेटवर्क पर आधारित हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा अब सिर्फ एक आईटी विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का अभिन्न हिस्सा है। अगले दशक में डिजिटल इंडिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आम नागरिकों का डेटा कितना सुरक्षित रहता है।
दुनिया भारत की ओर क्यों देख रही है?
भारत ने आधार (Aadhaar), यूपीआई (UPI), डिजिलॉकर (DigiLocker) और डीबीटी (DBT) के जरिए जिस स्तर का डिजिटल ढांचा खड़ा किया है, वह अन्य विकासशील एवं विकसित देशों के लिए एक मिसाल है। कई देश इस मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि, किसी भी मॉडल की वास्तविक सार्थकता समय के साथ आधुनिकीकरण में ही निहित है।
अगले दस साल की असली परीक्षा
डिजिटल इंडिया का पहला दशक आधारभूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के नाम रहा। दूसरा दशक ‘विश्वास और सुरक्षा’ कायम करने का होगा। अब केवल कनेक्टिविटी बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा; यह सुनिश्चित करना होगा कि:
- हर नागरिक साइबर रूप से सुरक्षित रहे।
- छोटे कारोबारी डिजिटल अर्थव्यवस्था का पूरा लाभ उठाएं।
- सरकारी सेवाएं सुगम और एकीकृत हों।
- नई तकनीकों के प्रयोग में व्यक्तिगत गोपनीयता (Privacy) सुरक्षित रहे।
निष्कर्ष
डिजिटल इंडिया ने पिछले दस वर्षों में देश के कामकाज की शैली को बदल दिया है। अब अगला पड़ाव केवल तकनीकी विस्तार का नहीं, बल्कि सुरक्षा, पारदर्शिता, समावेशन और जिम्मेदार नवाचार का है। यही निर्धारित करेगा कि डिजिटल इंडिया विकसित भारत के निर्माण में कितनी मजबूत भूमिका निभाता है।
