पंचतत्व में विलीन हुये दिशोम गुरु…
रांची: झारखंड की मिट्टी में आज आदिवासी अस्मिता के पुरोधा, दिशोम गुरु शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन हो गये। चांद-सूरज को साक्षी मानकर, सदियों से जलती अग्नि के हवाले उनका देह कर दिया गया और एक अध्याय इतिहास बन गया। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। पैतृक गांव नेमरा में बेटे CM हेमंत सोरेन ने उन्हें मुखाग्नि दी।

‘गुरुजी’ को अंतिम जोहार कहने को जन सैलाब उमड़ पड़ा।धरती की गोद में लौटे ‘दिशोम गुरु’संथाल परगना की माटी में जन्मे शिबू सोरेन ने जंगल, नदी और पर्वतों के बीच पलते संघर्षों से आदिवासी चेतना की मशाल जलाई। लाठियों और गोलियों के दौर में भी ‘संथाल हुंकार’ बनकर उभरे। आज वही स्वर कालजयी हो चला।राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक संघर्ष था उनका जीवनशिबू सोरेन सिर्फ नेता नहीं थे। वे आंदोलन की आत्मा थे। सदियों से हक के लिए जूझते आदिवासी समाज ने आज अपना पहरेदार खो दिया।

उनकी प्रमुख विरासत जल-जंगल-जमीन का अधिकार, अलग झारखंड राज्य का स्वप्न, आदिवासी स्वाभिमान की लड़ाई है।अग्नि के हवाले होते ही…अंधेरा घिरने लगा, मानो प्रकृति भी रो दी हो। दिशोम गुरु पंचतत्व में लीन हुये तो आसमान की ओर उठते धुएं ने जैसे पूरे झारखंड को संदेश दिया “माटी से जन्मा बेटा, माटी में ही अमर हो गया।”अंतिम संस्कार में कई राष्ट्रीय नेता शामिल हुये राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम, अन्नपूर्णा देवी टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन सांसद पप्पू यादवअर्जुन मुंडा, सुदेश महतो झारखंड के मंत्री-विधायक व कई गणमान्य
