हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला: 12 साल में 29 करोड़ रुपये की अवैध निकासी, 24 खातों में ट्रांसफर की गई राशि
झारखंड के हजारीबाग ट्रेजरी घोटाले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस मामले की जांच कर रही सीआईडी (CID) ने मुख्य साजिशकर्ता (किंगपिन) आरक्षी शंभु कुमार समेत कुल छह आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। जांच के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र (ID) का सहारा लेकर पिछले 12 वर्षों के दौरान लगभग 29 करोड़ रुपये का गबन किया।
सीआईडी द्वारा कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट में शंभु कुमार के अलावा उसकी पत्नी काजल कुमारी, आरक्षी रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह, रजनीश की पत्नी खुशबू कुमारी, रिश्तेदार सौरभ कुमार और आरक्षी धीरेंद्र सिंह को आरोपी बनाया गया है।
फर्जी टेंपररी आईडी बनाकर की गई करोड़ों की निकासी
सीआईडी की चार्जशीट के मुताबिक, यह पूरा फर्जीवाड़ा साल 2014 से 2026 के बीच अंजाम दिया गया। इन 12 वर्षों में पुलिसकर्मियों के वेतन मद (Salary Head) का इस्तेमाल कर फर्जी टेंपररी आईडी बनाई गईं और करोड़ों रुपये अवैध रूप से निकाले गए। अब तक की तफ्तीश में सामने आया है कि इस घोटाले की रकम को कुल 24 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था। सीआईडी अभी इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि जिन लोगों के खातों में यह पैसे भेजे गए, उन्हें इस धोखाधड़ी की भनक थी या नहीं। इस कार्रवाई के तहत सीआईडी अब तक लगभग 1.60 करोड़ रुपये की राशि को फ्रीज करा चुकी है।
शुरुआती दौर में जब यह मामला प्रकाश में आया था, तब हजारीबाग के लोहसिंघना थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें केवल आठ वर्षों के भीतर हजारीबाग जिला कोषागार से मात्र दो बैंक खातों में 15.41 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का जिक्र था।
आरोपियों ने जमीन और मकानों में निवेश किया और जेवरात खरीदे
इस पूरे घोटाले को हजारीबाग एसपी कार्यालय की लेखा शाखा (Accounts Branch) में कार्यरत तीन सिपाहियों—शंभु कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह ने मिलकर अंजाम दिया। गैरकानूनी तरीके से निकाली गई इस भारी-भरकम राशि का उपयोग आरोपियों ने अपने ऐशो-आराम के लिए किया। उन्होंने इस पैसे से कई जमीनों और मकानों में निवेश किया और कीमती जेवरात भी खरीदे। जांच में यह बात भी सामने आई है कि जिन लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल पैसे मंगाने के लिए किया गया था, उन्हें इन तीनों पुलिसकर्मियों द्वारा बकायदा कमीशन भी दिया जाता था।
