झारखंड: ACB को जांच में नहीं मिला कोई दोषी, लेकिन विभाग ने माना कि निर्माण में गड़बड़ी से 9 पुल हो गए ध्वस्त
झारखंड में पुलों के निर्माण और उनके क्षतिग्रस्त होने की जांच में एक हैरान करने वाला विरोधाभास सामने आया है। धनबाद सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में टूटे पुलों की जांच का जिम्मा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को दिया गया था, लेकिन एसीबी को अपनी जांच में कोई भी दोषी नहीं मिला। एसीबी ने कोर्ट में फाइनल क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि जांच के दौरान पाई गई कमियां केवल कुछ तथ्यों की भूल (Mistake of Fact) थीं, इसमें किसी का दोष नहीं था।
इसके विपरीत, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (Rural Engineering Department) द्वारा की गई विभागीय जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गईं और कई स्तरों पर कार्रवाई भी की गई। विभाग ने झारखंड हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि राज्य में पुलों के निर्माण कार्य में भारी कमियां रही हैं। विभाग की जांच के अनुसार, चार अलग-अलग जिलों के नौ पुलों के निर्माण में खामियां पाई गई हैं। इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार छह से ज्यादा इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, दो ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) किया गया है, जबकि एक ठेकेदार से दोबारा पुल का निर्माण कराया गया है। बाकी मामलों में भी विभागीय कार्रवाई जारी है।
सचिव ने हाइकोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया
ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सचिव मनोज कुमार ने इस संबंध में हाई कोर्ट में एक हलफनामा (Affidavit) जमा किया है। दरअसल, राज्य में करोड़ों रुपये की लागत से बने पुलों के ढहने के खिलाफ पंकज कुमार यादव ने कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी, जिस पर सुनवाई के दौरान अदालत ने विभाग से जवाब मांगा था। नियत समय पर जवाब दाखिल न करने के कारण कोर्ट ने विभाग पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था, जिसे अब विभाग ने जुर्माने की राशि के साथ जमा कर दिया है।
हलफनामे में विभाग ने पूर्व में हुई कार्रवाइयों का विवरण देते हुए बताया कि:
- गुमला जिला: छह पुलों की जांच के बाद 20 इंजीनियरों को कसूरवार पाया गया था और उन पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन बाद में अदालती आदेश के बाद सभी की सजा समाप्त हो गई।
- पलामू जिला: साल 2012 में कलसी बिल्डकॉन नामक कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट किया गया था, पर 2016 में कोर्ट के आदेश पर ब्लैकलिस्टिंग हट गई। मामले में आरोपी तीन इंजीनियर भी बाद में जांच में निर्दोष पाए गए।
- खूंटी जिला: यहाँ संबंधित ठेकेदार से दोबारा पुल का निर्माण कराया गया। वर्ष 2026 में उक्त ठेकेदार को डिबार (प्रतिबंधित) करते हुए दोषी इंजीनियरों के खिलाफ ‘प्रपत्र क’ गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। गुमला के अन्य क्षतिग्रस्त पुलों के मामले में भी संबंधित लोगों पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई हुई है।
इस एक उदाहरण से समझें : एसीबी ने कहा नहीं हुई कोई गड़बड़ी, विभाग ने ठेकेदार को किया ब्लैकलिस्ट
एसीबी और विभाग के बीच जांच के अंतर को बराकर नदी पर बने पुल के उदाहरण से समझा जा सकता है। इस नदी पर पुल निर्माण का ठेका गणेश राम डोकानिया नामक ठेकेदार को मिला था, लेकिन वर्ष 2009 में यह पुल धराशायी हो गया। 2010 में इस मामले की जांच एसीबी को सौंपी गई। एसीबी ने साल 2017 में अपनी अंतिम रिपोर्ट में सभी आरोपों को खारिज कर दिया, जबकि विभागीय जांच में अनियमितताएं पाते हुए ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया अपनाई गई।
