भारत का इमरजेंसी तेल स्टॉक कितने दिन चलेगा, 1 दिन का खर्च कितना, किन गुफाओं में है स्ट्रेटजिक ऑयल रिजर्व, जानें
India Strategic Oil Reserve: पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते अमेरिका-ईरान टकराव ने पूरी दुनिया की ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर हालात बेहद संवेदनशील हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। भारत इस संकट से अछूता नहीं है। अमेरिका और चीन ऐसे देश हैं, जिनके पास क्रूड ऑयल का बंपर स्टॉक है। स्टॉक तो भारत के पास भी है, लेकिन केवल महज 2.5 महीने का। हालांकि, भारत जैसी 140 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले देश के लिए पेट्रोल-डीजल की जरूरत भी बड़ी है। ऐसे में भारत अपना तेल रखता कहां है?
इससे पहले कि हम आपको भारत के स्ट्रेटजिक ऑयल रिजर्व्स के बारे में बताएं, कुछ आंकड़े आप जान लीजिए। भारत को एक दिन में लगभग 55 लाख बैरल तेल की जरूरत होती है। एक बैरल में 158.99 लीटर यानी मोटा-माटी 159 लीटर तेल होता है। अब अंदाजा लगा लीजिए भारत को कितना रिजर्व बनाकर रखना होगा। भारत अपनी कुल जरूरत का 85-90 प्रतिशत क्रूड ऑयल लगभग 40 देशों से आयात करता है। उसमें से होर्मुज स्ट्रेट के संकरे समुद्री रास्ते से लगभग 30 प्रतिशत आता है। अब यहां नाकेबंदी की स्थिति होने से तेल के दाम भी बढ़े हैं। शुरुआत में भारतीय तेल कंपनियों ने घाटा सहा, लेकिन अंततः तेल के दाम बढ़ाने पड़े।
भारत संकट के समय के लिए कच्चे तेल का बैकअप भूमिगत चट्टानी गुफाओं (Underground Rock Caverns) में रखता है, जिन्हें स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) कहा जाता है। आइए जानते हैं भारत की चार बेहद महत्वपूर्ण भूमिगत ऑयल केव्स के बारे में:
1. विशाखापत्तनम: देश का पहला रणनीतिक तेल भंडार
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में स्थित यह भूमिगत गुफा भारत की पहली कार्यात्मक रणनीतिक तेल भंडारण सुविधा है। इसकी कुल क्षमता लगभग 1.33 मिलियन मीट्रिक टन है। इस केंद्र के चालू होने से देश को आपातकालीन स्थितियों में कच्चे तेल की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, जिससे रिफाइनरी संचालन को लगातार जारी रखने में मदद मिलती है।
2. मंगलुरु: UAE के सहयोग वाला अहम केंद्र
मंगलुरु में स्थित रणनीतिक तेल भंडारण केंद्र की क्षमता लगभग 1.5 मिलियन मीट्रिक टन है। यह सुविधा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा साझेदारी के लिए भी खास मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई की कंपनी ADNOC (Abu Dhabi National Oil Company) यहां पहले से अपना कच्चा तेल स्टोर करती रही है। इससे भारत और UAE के बीच ऊर्जा सहयोग और मजबूत हुआ है। मंगलुरु का यह केंद्र भारत की पश्चिमी तट की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।
3. पडूर: पहले चरण का सबसे बड़ा तेल भंडारण स्थल
कर्नाटक के पडूर (उपनगर) में मौजूद रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व भारत के SPR प्रोजेक्ट के पहले चरण का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां चार अलग-अलग कम्पार्टमेंट बनाए गए हैं और हर एक की क्षमता करीब 0.625 मिलियन मीट्रिक टन है। यानी कुल 2.5 एमएमटी (Million Metric Tonnes) की बड़ी स्टोरेज क्षमता के कारण पडूर को भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का प्रमुख हिस्सा माना जाता है।
4. चांदीखोल: भविष्य की सबसे बड़ी स्टोरेज परियोजना
ओड़िशा के चांदीखोल में एक नई रणनीतिक तेल भंडारण परियोजना पर काम चल रहा है। इस सुविधा को लगभग 4 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल रखने के हिसाब से डिजाइन किया गया है।
बाकी का स्टोरेज कहां है?
इन सरकारी भूमिगत भंडारों से भारत की मात्र 9-10 दिन की जरूरत पूरी होती है। लेकिन जैसा कि शुरुआत में बताया गया कि भारत के पास कुल मिलाकर लगभग 2.5 महीने (यानी करीब 74 दिन) का स्टॉक रहता है, तो बाकी का तेल कहाँ है? दरअसल, शेष 64-65 दिनों की खपत का तेल भारत की सार्वजनिक और निजी तेल विपणन कंपनियों (जैसे- IOCL, BPCL, HPCL) के अपने व्यावसायिक रिफाइनरी टैंकों और पाइपलाइनों में सुरक्षित रहता है।

अन्य स्टोरेज बनाने पर भी ध्यान दे रहा भारत
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकट का असर यहां पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों पर तेजी से दिखाई देता है। होर्मुज संकट से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर दबाव बढ़ा है। ऐसे हालात ने यह साफ कर दिया कि केवल तेल खरीदना ही काफी नहीं है, बल्कि लंबे समय तक सुरक्षित भंडारण की क्षमता भी उतनी ही जरूरी है। यही वजह है कि भारत अब अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने पर तेजी से काम कर रहा है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश में सरकार जमीन के ऊपर (Above-ground Storage) भी तेल भंडारण करने की योजना बना रही है। राजस्थान में सबसे ज्यादा 5.625 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का स्टोरेज रखने का प्लान है। वहीं, मंगलुरु और मध्य प्रदेश के बीना में भी इसी तरह की तैयारी है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत इन प्रोजेक्ट्स को डेवलप किया जाएगा। इसके साथ ही फिलहाल भारत के पास जो तेल भंडार हैं, उनकी स्टोरेज क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है।
भारत की यूएई के साथ अहम डील
तेल समस्या के समाधान की इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूएई दौरे के दौरान ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े कई अहम समझौते हुए। इनमें LPG सप्लाई, रक्षा सहयोग और रणनीतिक तेल भंडारण से जुड़े समझौते शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण समझौता यूएई की अबूधाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के साथ हुआ, जिसके तहत कंपनी भारत के रणनीतिक तेल भंडार नेटवर्क में लगभग 30 मिलियन बैरल तक कच्चा तेल स्टोर कर सकेगी। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में भारत का ऑयल रिजर्व और अधिक मजबूत होने वाला है।
