ईरानी स्पीकर गालीबाफ बोले- इरादा तो नेक है पर अमेरिका पर भरोसा नहीं; फ्लाइट में लाए पीड़ितों की तस्वीरें
ईरानी स्पीकर कलीबाफ बोले- नेक नीयती तो है, पर अमेरिका पर भरोसा नहीं
पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी भारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से आज शनिवार (11 अप्रैल) को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस शांति वार्ता में हिस्सा लेने के लिए ईरान की संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बागेर कलीबाफ शुक्रवार देर रात एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ वहां पहुंच गए हैं। एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए कलीबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान बातचीत के लिए ‘सकारात्मक इरादा’ (गुडविल) तो रखता है, लेकिन उसे अमेरिका पर रत्ती भर भी ‘भरोसा’ नहीं है।

ईरान ने बातचीत से पहले रखीं दो बड़ी शर्तें
एक बेहद भावुक संदेश देते हुए स्पीकर कलीबाफ अपनी आधिकारिक उड़ान में ‘मीनाब घटना’ के पीड़ितों की तस्वीरें भी साथ लेकर इस्लामाबाद पहुंचे। उन्होंने इन तस्वीरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर साझा करते हुए उन्हें अपना ‘सफर का साथी’ बताया। ईरानी मीडिया के मुताबिक, कलीबाफ ने साफ कर दिया है कि किसी भी औपचारिक बातचीत से पहले दो मुख्य शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है:
- लेबनान में तुरंत युद्धविराम (सीजफायर) लागू किया जाए।
- अमेरिका द्वारा रोकी गई (फ्रीज की गई) ईरान की संपत्तियों को तत्काल रिलीज किया जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका इस वार्ता को केवल एक ‘दिखावा’ या ‘छलावा’ समझता है, तो ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अपनी सैन्य शक्ति का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।
डेढ़ साल के भीतर दो बार हमले का आरोप
इस्लामाबाद पहुंचे ईरानी डेलिगेशन में विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची, रक्षा परिषद के सचिव अली अकबर अहमदियान और सेंट्रल बैंक के गवर्नर सहित कई सैन्य और आर्थिक विशेषज्ञ शामिल हैं। कलीबाफ ने पिछले अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 18 महीनों में दो बार ऐसा हुआ है जब बातचीत के दौरान ही ईरान पर हमले किए गए। उन्होंने दोहराया कि ईरान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका की ओर से जेडी वेंस करेंगे अगुवाई
दूसरी तरफ, अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जो इस्लामाबाद के लिए रवाना हो चुके हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस टीम में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर भी शामिल हैं। वेंस ने अपने बयान में कहा कि यदि ईरान ईमानदारी के साथ मेज पर आता है, तो अमेरिका दोस्ती के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ईरान ने बातचीत में चालाकी करने की कोशिश की, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीजफायर के दायरे पर बना है विवाद
यह पूरी कूटनीतिक कवायद अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए की जा रही है। मुख्य विवाद सीजफायर के दायरे को लेकर है; ईरान का दावा है कि इस समझौते में लेबनान पर इजरायली हमलों को रोकना भी शामिल है। वहीं, अमेरिका और इजरायल का तर्क है कि यह सीजफायर हिजबुल्लाह के ठिकानों पर लागू नहीं होता। इसी गतिरोध के बीच आज होने वाली इस बैठक पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं कि क्या पश्चिम एशिया में युद्ध की समाप्ति का कोई रास्ता निकलेगा।
