खरसावां में प्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा सात जुलाई को, तैयारियों को लेकर सरकारी पूजा समिति की बैठक,18 लाख से बनकर तैयार प्रभु जगन्नाथ का नया रथ
खरसावां में ओड़िशा के पुरी के तर्ज पर प्रभु जगन्नाथ की रथयात्रा आगामी 7 जुलाई को निकाली जाएगी। इसकी तैयारी को लेकर शनिवार को खरसावां मुख्यालय के सभागार में सरकारी पूजा समिति की बैठक खरसावां अंचल अधिकारी कुमारी शीला उरावं की अध्यक्षता में की गई। बैठक में बताया गया कि खरसावां में 18 लाख की लागत से प्रभु जगन्नाथ का नए रथ निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है। प्रभु जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा में 70 हजार रूपये खर्च होगे। इस वर्ष प्रभु जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा के साथ नए रथ पर सवार हो कर अपने जन्म स्थान मौसीबाड़ी-गुंडिचा मंदिर पहुचेगे। गुंडिचा मंदिर में नौ दिन रहने के बाद पुन रथ पर सवार हो कर पुन अपने निज मंदिर को वापस लौटेगे।

रथ यात्रा के दौरान आस्था की डोर को खींचने के लिये भक्त पूरे साल का इंतजार रहता है। रथ यात्रा का प्रसंग स्कंद पुराण, पद्म पुराण, पुरुषोत्तम माहात्म्य, बृहद्धागवतामृत में भी वर्णित है। शास्त्रों और पुराणों में भी रथ यात्रा की महत्ता को स्वीकार किया गया है।यह है रथयात्रा का धार्मिक कार्यक्रमआगामी 7 जुलाई को सुबह 8 बजे से पारंपरिक विधि विधान के तहत नेत्र उत्सव की पूजा-अर्चना होगी। साथ ही प्रभु जगन्नाथ के नवयौवन रूप दर्शन देगे। वही शाम 4 बजे से 18 लाख की लागत से प्रभु जगन्नाथ का नए रथ का पूजा-अर्चना होगा। शाम 5 बजे जय जगन्नाथ के उदघोष एवं छैरा पैरा परंपराओं के तहत प्रभु जगन्नाथ बहन सुभद्रा व बडे भाई बलराम की प्रतिमा को पूजनोपरांत एक-एक कर रथ पर विराजमान किया गया।

साथ ही जगन्नाथ मंदिर से गुड़िचा मंदिर के लिए रथ यात्रा रवाना होगी। जबकि 11 जुलाई को हेरा पंचमी पर मां लक्ष्मी द्वारा रथ भगिनी तथा 15 जुलाई को श्री जगन्नाथ गुड़िचा मंदिर से श्री जगन्नाथ मंदिर तक बाहुड़ा यात्रा निकलेगी।प्रभु जगन्नाथ के रथ निर्माण कार्य अंतिम चरण में-सीओखरसावां अंचल अधिकारी शीला उरांव ने कहा कि पुरी (ओड़िशा) के तर्ज पर प्रभु जगन्नाथ के भव्य रथ का निर्माण किया जा रहा है। इस वर्ष प्रभु जगन्नाथ नये रथ पर सवार हो कर गुंडिचा मंदिर पहुंचेंगे। प्रभु जगन्नाथ के नए रथ को आकर्षक रथ बनाया जा रहा है। रथ की ऊंचाई 25 फीट, चौडाई 12 फीट व लंबाई 18 फीट के आस पास है। आठ पहिया लगा है। ओड़िशा के मयुरभंज के कारीगरों द्वारा रथ का निर्माण किया जा रहा है। रथ का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।रथ यात्रा के लिये सरकार से मिलता है आवंटन खरसावां में प्रभु जगन्नाथ के रथ यात्रा समेत विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिये राज्य सरकार से आवंटन मिला है।

आजादी से पूर्व यहां रथ यात्रा समेत विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के लिये राजघराने के राजकोष से राशि उपलब्ध कराया जाता था। 1947 में देश के आजादी के पश्चात सभी धार्मिक अनुष्ठानों के लिये राज्य सरकार आवंटन उपलब्ध कराती है. जानकारी के अनुसार 1947 में तमाम देशी रियासतों के भारत गणराज्य में विलय के दौरान खरसावां के तत्कालिन राजा श्रीरामचंद्र सिंहदेव व सरकार के बीच इसको लेकर मर्जर एग्रिमेंट किया गया था। इसके बाद इन धार्मिक अनुष्ठानों के लिये राज्य सरकार राशि उपलब्ध कराती है।ये थै मौजूदप्रमुख मनेन्द्र जामुदा, खरसावां सीओ शीला उरांव, प्रधान लिपिक प्रभाष कुमार साहु, एसआई सुधान्शु कुमार, डॉ मनोज कुमार, नंदु कुमार पांडेय, गोर्वधन राउत, नयन नायक, सुशील सांडगी, राकेश दास, बैधनाथ नायक, शम्भू मंडल, मानिक सिंहदेव, राकेश बिषेई आदि मौजूद थे।वित्तीय वर्ष-2023-24 सरकारी पूजा-पाठ में होने वाले खर्चÛ चड़क पूजा-40 हजार,Û रथ यात्रा-70 हजार,Û सांस्कृतिक कार्यक्रम-1 लाख,Û चौत्र महोउत्सव (भैरव पूजा)-1‐30 लाख,Û धुलिया जांताल-22 हजार,Û इन्द्रो उत्सव-12 हजार,Û मोहर्रम-20 हजार,Û नुआखाई जांताल-20 हजार,Û दुर्गा पूजा-1,25 लाख,Û काली पूजा-60 हजार,Û साप्ताहिक पाउंड़ी पूजा-2‐60 लाख।
