उड़िया भाषा संरक्षण के लिए सरायकेला परिषदन में बैठक संपन्न
सरायकेला : परिषदन में पितवास प्रधान की अध्यक्षता में उड़िया भाषा को संरक्षित और संगठित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सामाजिक, नैतिक, और शैक्षणिक पहलुओं पर गहन चर्चा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य उड़िया भाषा को संगठित करना, इसके प्रचार-प्रसार के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना तथा भाषा और शिक्षा से संबंधित समस्याओं का समाधान ढूंढना था। अशोक षाड़ंगी, भाजपा नेता और झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने शिक्षा और उड़िया भाषा के संरक्षण पर गहरी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि उड़िया भाषा के स्कूल योजनाबद्ध तरीके से बंद किए जा रहे हैं। शिक्षकों की नियुक्ति में लापरवाही बरती जा रही है। बच्चों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो रही हैं। उन्होंने इस स्थिति को सुधारने के लिए संघर्ष और आंदोलन चलाने का आह्वान किया। साथ ही, उड़िया भाषा को बचाने और प्रचार-प्रसार के लिए शिक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया। बैठक में विशेष रूप से झारखंड ओड़िया विकास समिति के गठन पर चर्चा की गई, जिसके बैनर तले सभी उड़िया भाषी एकजुट होंगे। कोल्हान स्तर पर एक बड़े कार्यक्रम के आयोजन का निर्णय लिया गया, जिसमें तीनों जिलों के उड़िया भाषी भाग लेंगे। उड़िया भाषा के संरक्षण के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार की जाएगी।

बैठक में विभिन्न बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे। इनमें पितवास प्रधान, सरोज महापात्र, निर्मल आचार्य, संजय मोहंती, जलीश कवि, राजा सिंह देव, रवि सतपति, सुशील कुमार षाड़ंगी, भोला मोहंती, अभिषेक आचार्य, नंदू पांडे, अजय प्रधान, बाबू मिश्रा, कुनाल रथ, सपन मंडल, बिपलब पाणी, रिलु पाणी शामिल थे। बैठक में मौजूद सभी लोगों ने उड़िया भाषा के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसके तहत भाषा से जुड़े मुद्दों को हल करने और इसे समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।बैठक ने उड़िया भाषा के उत्थान के लिए एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की है।
